सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति के इतिहास में आज एक ऐसा अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक असंभव लगती थी। करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र बिंदु रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस एक कदम के साथ ही बिहार की सियासत में ‘नीतीश युग’ के अंत की आधिकारिक शुरुआत मानी जा रही है।
अमित शाह की मौजूदगी में होगा शक्ति प्रदर्शन
राजधानी पटना में आज भारी हलचल है। जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार के साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी राज्यसभा के लिए पर्चा भरेंगे। इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद मौजूद रह सकते हैं। अमित शाह का पटना आगमन इस बात का संकेत है कि बिहार में सत्ता हस्तांतरण और भविष्य की रणनीति को लेकर बीजेपी बेहद गंभीर है और फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
क्यों लिया गया यह चौंकाने वाला फैसला?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार ने यह बड़ा फैसला अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों के चलते लिया है। 2005 से (बीच के कुछ महीनों को छोड़कर) लगातार बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश अब केंद्र की राजनीति में एक नई भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि यह बीजेपी और जेडीयू के बीच किसी बड़े ‘पावर शेयरिंग’ समझौते का हिस्सा हो सकता है।
जेडीयू कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश
नीतीश कुमार के इस फैसले ने उनके समर्थकों और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकर्ताओं को गहरे सदमे में डाल दिया है। पटना स्थित पार्टी दफ्तर के बाहर सुबह से ही पुराने कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा हुआ है।
नेतृत्व का संकट: कार्यकर्ताओं का तर्क है कि नीतीश कुमार के बिना जेडीयू को एकजुट रखना असंभव होगा। पार्टी के भीतर फिलहाल कोई ऐसा दूसरा चेहरा नहीं दिखता, जिसकी स्वीकार्यता पूरे बिहार में हो।
विरोध की सुगबुगाहट: कई कार्यकर्ता इस फैसले के विरोध में प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि “नीतीश बाबू को अभी बिहार की जरूरत है, उन्हें दिल्ली नहीं जाना चाहिए।”
बिहार की राजनीति में अब क्या?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। क्या बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाएगी या जेडीयू से ही किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा? फिलहाल बिहार की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ से ‘नया बिहार’ उदय होने वाला है, लेकिन कार्यकर्ताओं की आंखों में अपने नेता के विदा होने की मायूसी साफ देखी जा सकती है।