- हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई-हम सब हैं भाई-भाई! : सूरजभान सिंह
- दल अलग हो सकते हैं, मगर दिल तो एक ही है! : ललन सिंह
सिटी पोस्ट लाइव
मोकामा। होली सिर्फ रंगों और उमंग का त्योहार नहीं है, बल्कि यह मेल-मिलाप और सौहार्द्र का भी प्रतीक है। इस साल मोकामा में आयोजित होली मिलन समारोह में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब राजनीति के दो धुर-विरोधी नेता, पूर्व सांसद और लोजपा के वरिष्ठ नेता सूरजभान सिंह और भाजपा के कद्दावर नेता ललन सिंह एक ही मंच पर नजर आए।
रविवार की शाम सूरजभान सिंह ने इस भव्य समारोह का आयोजन किया, जिसमें न केवल मोकामा बल्कि बिहार के विभिन्न जिलों से आए गणमान्य लोगों और राजनीतिक हस्तियों ने शिरकत की। होली के पारंपरिक गीतों, ढोल-नगाड़ों और वसंती बयार में झूमते लोगों के बीच माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया था।

राजनीतिक मंच पर विरोधी, मगर होली में भाईचारा
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत तब देखने को मिली जब लोजपा के सूरजभान सिंह और भाजपा के ललन सिंह एक-दूसरे के साथ खुलकर हंसी-मजाक और बातचीत करते नजर आए। यह नज़ारा इसलिए भी खास था क्योंकि राजनीतिक मंच पर दोनों के दल अलग-अलग गुटों में बंटे हुए हैं और कई मुद्दों पर आमने-सामने रहे हैं।
“होली सिर्फ रंगों का ही नहीं बल्कि दिलों को जोड़ने का भी पर्व है। हम सबको यह नहीं भूलना चाहिए कि सबसे पहले हम इंसान हैं। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई-हम सब भाई-भाई हैं। यही त्योहार का असली संदेश है।”
– सूरजभान सिंह , पूर्व सांसद

होली में गैर भी गले मिलते हैं, फिर हम तो साथी रहे हैं। हमारे राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है, हमारे दल अलग हो सकते हैं, मगर दिल तो एक ही है।
– ललन सिंह, भाजपा नेता
होली के बहाने राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा
चूंकि यह साल चुनावी वर्ष है, ऐसे में इस मुलाकात को लेकर सियासी हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। जहां एक ओर इसे गैर-राजनीतिक आयोजन बताया जा रहा है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तस्वीर के कई गहरे मायने हैं। गौरतलब है कि सूरजभान सिंह का बिहार की राजनीति में मजबूत प्रभाव है, खासकर लोजपा में उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। दूसरी ओर, ललन सिंह भाजपा के महत्वपूर्ण चेहरे हैं और पार्टी के लिए रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन दोनों दिग्गजों का एक मंच पर आना राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा करने के लिए काफी है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल
- क्या यह सिर्फ एक सामाजिक सौहार्द्र का संदेश देने का प्रयास था या इसके पीछे कोई गुप्त रणनीति छुपी हुई है?
- क्या आगामी चुनावों में लोजपा और भाजपा के बीच किसी संभावित गठबंधन के संकेत दिए जा रहे हैं?
- क्या बिहार की राजनीतिक तस्वीर बदलने वाली है और नए समीकरण बन सकते हैं?
कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा
चुनावी साल में राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच इस प्रकार की मेल-जोल वाली तस्वीरें जनता के बीच अच्छा संदेश देती हैं। ऐसे आयोजनों से राजनीतिक कार्यकर्ताओं में भी एक नई ऊर्जा का संचार होता है। भले ही सूरजभान सिंह और ललन सिंह ने इसे गैर-राजनीतिक आयोजन बताया हो, मगर सियासत के जानकार इसे हल्के में लेने को तैयार नहीं हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह मेल-मिलाप महज होली के रंगों तक सीमित रहता है या फिर आने वाले चुनावों में इसका कोई असर देखने को मिलता है।