सिस्टम की ‘एक्सपायरी’ या मरीजों की जान से खिलवाड़? उजियारपुर में स्वास्थ्य केंद्र बना लापरवाही का अड्डा!..

Ritu Raj

कहने को तो यह अस्पताल ग्रामीणों की ‘सेहत’ सुधारने के लिए है, लेकिन हकीकत में यहाँ लापरवाही का ‘जहर’ बांटा जा रहा है। उजियारपुर प्रखंड के नाजिरपुर स्वास्थ्य केंद्र से आई तस्वीरें और ग्रामीणों के आरोप स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल रहे हैं।

एक्सपायरी दवाओं का ‘खतरनाक’ खेल;
अस्पताल पहुंचे मरीजों ने जब दवा की खिड़की से मिली गोलियों के पैकेट देखे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें ऐसी दवाएं थमाई जा रही हैं जिनकी एक्सपायरी डेट (मियाद) महीनों पहले खत्म हो चुकी है। ग्रामीण इसे सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि “सरकारी तंत्र द्वारा की जा रही हत्या की साजिश” करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि ये दवाएं ठीक करने के बजाय जान ले सकती हैं।

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नियम ताक पर: ₹2 की पर्ची, ₹5 की वसूली
गरीब मरीजों की जेब पर डाका डालने का खेल भी यहाँ बदस्तूर जारी है। सरकारी प्रावधान के अनुसार, निबंधन (पर्ची) शुल्क मात्र 2 रुपये है, लेकिन ग्रामीणों का संगीन आरोप है कि कर्मचारियों द्वारा जबरन 5 रुपये वसूले जा रहे हैं। विरोध करने पर मरीजों को अनसुना कर दिया जाता है।

‘रिवायत’ बन चुकी है लेटलतीफी;
सुबह की कड़कड़ाती ठंड और धूप में बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार बच्चे घंटों अस्पताल के गेट पर ‘साहब’ के आने का इंतजार करते हैं। वहीं, स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्वास्थ्य केंद्र का देर से खुलना अब यहाँ की स्थायी परंपरा बन चुकी है।

जब इन गंभीर आरोपों पर अस्पताल के डॉक्टर से सवाल किया गया, तो उन्होंने इन्हें बेबुनियाद बताया। डॉक्टर का कहना है कि “दवाएं पूरी जांच के बाद ही दी जाती हैं। देर से आने और अतिरिक्त वसूली के आरोप झूठे हैं।” डॉक्टर के दावों और ग्रामीणों के गुस्से के बीच अब सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग की जांच ही सच सामने लाएगी। सवाल यह है कि अगर डॉक्टर सही हैं, तो मरीजों के पास एक्सपायरी दवाएं कहाँ से आईं? क्या सीसीटीवी या रजिस्टर की जांच कर अस्पताल के खुलने के समय की पुष्टि की जाएगी? अवैध वसूली के पैसों का बंदरबांट ऊपर तक तो नहीं?

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