सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में पिछले कुछ दिनों से हत्या और दुष्कर्म की घटनाओं में आई अचानक बाढ़ ने राज्य की सियासी फिजां को गरमा दिया है। पटना के चर्चित नीट (NEET) छात्रा मौत मामले के बीच अब गोपालगंज में डेढ़ साल की मासूम के साथ हुई दरिंदगी ने आग में घी डालने का काम किया है। इस भयावह स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सरकार की साख पर कड़े सवाल उठाते हुए इसे राज्य के लिए “आपातकालीन परिस्थिति” करार दिया है।
“मदमस्त सरकार अब तो जागो”: तेजस्वी का सीधा प्रहार
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर सरकार को घेरते हुए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने लिखा, “गोपालगंज में अब फिर डेढ़ साल की बच्ची से रेप… NDA राज में बिहार की बच्चियाँ एकदम असुरक्षित हैं।” तेजस्वी ने एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मशीन और मशीनरी के दम पर जीत हासिल करने वाली यह सरकार अब मदमस्त हो चुकी है। उन्होंने मंत्रियों को नसीहत दी कि वे विपक्ष पर हमला करने के बजाय राज्य की बदहाल शिक्षा, स्वास्थ्य और लचर कानून व्यवस्था पर ध्यान दें।
सत्ता संरक्षित अपराध के आरोप
तेजस्वी ने अपने पोस्ट में इन घटनाओं को “सत्ता संरक्षित” बताते हुए कहा कि प्रतिदिन होने वाली ये आपराधिक वारदातें असहनीय, पीड़ादायक और डरावनी हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में ललकारते हुए कहा— “संभलो तंत्र से जीती सरकार, करो अपराधी दानवों का संहार, बचाओ बेटियों की जान।” उनके इस बयान ने बिहार पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की कार्यकुशलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
शंभू हॉस्टल कांड से बढ़ा आक्रोश
जहानाबाद की छात्रा की पटना के शंभू हॉस्टल में हुई संदिग्ध मौत ने पहले ही मामले को तूल दे रखा है। फॉरेंसिक जांच में देरी और पुलिस की थ्योरी को लेकर राजनीतिक दलों में भारी आक्रोश है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार रसूखदार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। गोपालगंज की नई घटना ने इस आग को और भड़का दिया है, जिससे अब आम जनता के बीच भी असुरक्षा की भावना घर करने लगी है।
फिलहाल, बिहार की जनता और राजनीतिक गलियारे को एसआईटी (SIT) की उस फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है, जो यह तय करेगी कि क्या बिहार में वास्तव में अपराधियों का ‘दानव संहार’ होगा या बेटियों की चीखें राजनीति के शोर में दबकर रह जाएंगी।