तेजस्वी यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं: विधानसभा के बाद अब राज्यसभा में भी ‘क्लीन स्वीप’ की तैयारी में NDA

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी शिकस्त के बाद राजद नेता तेजस्वी यादव के लिए राजनीतिक चुनौतियाँ खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहाँ तेजस्वी यादव फिलहाल विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार एनडीए ने अगले साल अप्रैल 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी बिसात बिछा दी है। ताजा समीकरणों के अनुसार, राजद के हाथ से अपने कोटे की सीटें भी खिसकती नजर आ रही हैं।

राज्यसभा का गणित: महागठबंधन के पास ‘नंबर गेम’ की कमी
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सदन के भीतर सीटों के समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। अप्रैल 2026 में बिहार से राज्यसभा की 5 सीटें खाली हो रही हैं। वर्तमान में इन सीटों का बंटवारा कुछ इस प्रकार है:

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• राजद (RJD): 2 सीटें (प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह)

• जदयू (JDU): 2 सीटें (हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर)

• रालोमो (RLM): 1 सीट (उपेंद्र कुशवाहा)

नियम के अनुसार, बिहार से एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। चुनाव परिणामों के बाद महागठबंधन का कुनबा सिमट कर महज 35 विधायकों पर रह गया है। ऐसे में तेजस्वी यादव अपनी पार्टी की एक भी सीट सुरक्षित करने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं।

NDA का ‘मिशन 5-0’: सेंधमारी की कोई गुंजाइश नहीं
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के रणनीतिकारों ने अभी से ‘मिशन 5-0’ पर काम करना शुरू कर दिया है। एनडीए की कोशिश है कि राजद के कोटे वाली दोनों सीटें छीनकर उच्च सदन में अपनी ताकत बढ़ाई जाए। महागठबंधन के पास संख्या बल इतना कम है कि उन्हें एक सीट जीतने के लिए भी एनडीए खेमे में बड़ी सेंधमारी करनी होगी, जो मौजूदा राजनीतिक माहौल में लगभग असंभव नजर आता है।

विपक्ष में सन्नाटा, सत्ता पक्ष में सक्रियता
जहाँ एक ओर एनडीए खेमे में उम्मीदवारों के चयन और सीटों के बंटवारे को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है, वहीं महागठबंधन में अभी तक कोई हलचल नहीं दिख रही है। राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति और विधायकों की कम संख्या ने राजद कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ दिया है। यदि यही स्थिति रही, तो अप्रैल में तेजस्वी यादव को एक और बड़ी राजनैतिक मात मिलनी तय है।

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