2025 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के लिए आगामी राज्यसभा चुनाव किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं हैं। संख्या बल के गणित में खुद को कमजोर पाते हुए भी, पार्टी ‘अंदरखाने’ ऐसी व्यूह रचना कर रही है जिससे न केवल गठबंधन सुरक्षित रहे, बल्कि विरोधियों को भी कड़ा संदेश जाए।
प्रेमचंद गुप्ता की घर वापसी?
RJD की रणनीति का सबसे दिलचस्प हिस्सा झारखंड से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव पार्टी के पुराने रणनीतिकार प्रेमचंद गुप्ता को झारखंड के रास्ते राज्यसभा भेजने की तैयारी में हैं। 4 अगस्त 2025 को शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई सीट और भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने से झारखंड में समीकरण बदल रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेमचंद गुप्ता लालू परिवार के बेहद विश्वसनीय माने जाते हैं। हांगकांग के पूर्व NRI और 118 करोड़ की संपत्ति वाले गुप्ता का ‘मैनेजमेंट’ कौशल पार्टी के लिए हमेशा संकटमोचक रहा है।
अमरेंद्र धारी (AD) सिंह पर भरोसा;
बिहार में अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए तेजस्वी एक बार फिर AD सिंह पर दांव खेल सकते हैं। पिछली बार की तरह इस बार भी उन्हें पार्टी के ‘A to Z’ सोशल इंजीनियरिंग कार्ड के रूप में देखा जा रहा है। रियल एस्टेट और केमिकल सेक्टर के बड़े कारोबारी AD सिंह (संपत्ति: 118 करोड़) चुनावी रणनीति और संसाधनों को जुटाने में माहिर माने जाते हैं।
चुनौतियां और समीकरण;
| चुनौती | विवरण |
| महाठबंधन की एकता | वामदलों और कांग्रेस को साथ लेकर चलना अनिवार्य है। |
| ओवैसी फैक्टर | सीमांचल की राजनीति और ओवैसी (AIMIM) को साधना तेजस्वी की बड़ी प्राथमिकता है। |
| संसाधन और मैनेजमेंट | संख्या बल कम होने की स्थिति में ‘मैनेजिंग पावर’ वाले उम्मीदवारों (जैसे गुप्ता और सिंह) की भूमिका अहम हो जाती है। |