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ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए हवलदार सुनील सिंह यादव का पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गाँव नरबतपुर, बक्सर पहुंचा। उनके घर के पास पहुंचते ही सन्नाटा छा गया और परिवार के सदस्यों, दोस्तों, और ग्रामीणों में गहरी शोक की लहर दौड़ गई। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। पार्थिव शरीर के साथ गांव की सीमा तक एक तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोग बाइक पर हाथों में तिरंगा थामे हुए थे और ‘वंदे मातरम’, ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए शहीद को श्रद्धांजलि दे रहे थे।
हवलदार सुनील सिंह यादव ऑपरेशन सिंदूर के तहत कश्मीर के राजौरी में तैनात थे। 9 मई की रात पाकिस्तान द्वारा किए गए ड्रोन हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका प्राथमिक इलाज किया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर 15 मई को उन्हें एयरलिफ्ट कर उधमपुर अस्पताल भेजा गया। इलाज के दौरान 21 दिन तक जीवन और मृत्यु के बीच झूलने के बाद उन्होंने गुरुवार शाम को अपनी अंतिम सांस ली।
सुनील सिंह के दो बेटे हैं, जिनमें से बड़े बेटे की उम्र 14 साल और छोटे बेटे की उम्र 8 साल है। बक्सर के रानी घाट पर, शहीद सुनील के बड़े बेटे ने भावुक होकर मुखाग्नि दी। इस मौके पर बक्सर जिले के डीएम, विद्यानंद सिंह और एसपी, शुभम आर्य भी मौजूद थे और उन्होंने शहीद को सम्मान दिया। सुनील सिंह के परिजनों ने सरकार से नौकरी और मुआवजे की मांग की। उनका कहना था कि सरकार यदि परिवार को नौकरी और मुआवजा प्रदान करती है, तो इससे उनके परिवार को कुछ हद तक सांत्वना मिलेगी।