जिंदगी की कीमत पर रोज का सफर, प्रशासन देख रहा तमाशा
सिटी पोस्ट लाइव
लखीसराय जिले के किऊल नदी पर बना कच्चा पुल हाल ही में आई बाढ़ के कारण डूब चुका है, जिससे लखीसराय और किऊल स्टेशन के बीच आवागमन लोगों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है। सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग के अभाव में ग्रामीण और शहरवासी मजबूरी में रेल पटरी का सहारा ले रहे हैं। सुबह और शाम के समय सैकड़ों लोग रेलवे ट्रैक पर चलते देखे जा सकते हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।

हालांकि जिला प्रशासन ने डूबे हुए अस्थायी पुल पर धारा 144 लागू कर दी है, लेकिन लोगों के पास कोई और विकल्प नहीं होने के कारण वे इस आदेश की अनदेखी कर रहे हैं। रेलवे द्वारा बनाए गए पैदल पुल की स्थिति भी अत्यंत खराब है—यह संकरा और असुरक्षित है, जिससे लोग इसका उपयोग करने से कतराते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और रेलवे की उदासीनता के चलते यह समस्या वर्षों से बनी हुई है। रेलवे और आरपीएफ द्वारा कई बार जागरूकता अभियान चलाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई सुधार नहीं हुआ। इस स्थिति से न केवल आम लोग प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि यह ट्रेन परिचालन के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन गई है। दुर्घटनाओं की संभावना लगातार बनी हुई है, जिससे लोगों में भय व्याप्त है।
स्थानीय प्रशासन और रेलवे से मांग की जा रही है कि या तो डूबे पुल की मरम्मत की जाए या एक सुरक्षित और स्थायी वैकल्पिक रास्ता तत्काल बनाया जाए। जब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक लोगों की जान खतरे में बनी रहेगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब विलंब नहीं, बल्कि त्वरित एक्शन की जरूरत है।