नई नीतीश सरकार के शपथ ग्रहण के बाद अब बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल पहली कैबिनेट मीटिंग की तारीख का है। अनुमान है कि 25 नवंबर के बाद शुरुआती हफ्ते में ही मंत्रिमंडल की पहली बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें एनडीए के ‘संकल्प पत्र 2025’ की कई अहम योजनाओं को मंजूरी मिल सकती है। यह बैठक नई सरकार की कार्ययोजना तय करेगी और युवाओं, महिलाओं, किसानों व गरीबों से जुड़े वादों में से किसी एक बड़े फैसले के ऐलान की पूरी संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि पहली कैबिनेट बैठक में उन योजनाओं को सबसे पहले रखा जा सकता है, जिन्हें एनडीए ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने ‘पहले 100 दिनों’ के एजेंडे में शामिल किया था। इनमें युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी स्कीमें, महिलाओं के आत्मनिर्भरता कार्यक्रम और गरीबों को राहत देने वाली पंचामृत योजना प्रमुख मानी जा रही हैं। सरकार युवाओं के लिए बड़े स्तर पर भर्ती अभियान शुरू करने की तैयारी में है। घोषणापत्र में एनडीए ने 1 करोड़ से अधिक सरकारी नौकरियों की गारंटी दी थी, ऐसे में पहली कैबिनेट बैठक में नियुक्ति प्रक्रियाओं को तेजी देने संबंधी कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। किसानों को राहत देने के लिए MSP गारंटी कानून और किसान सम्मान निधि बढ़ाने को लेकर भी शुरुआती कदम या संबंधित समिति के गठन पर चर्चा संभव है। महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ का वादा भी चुनाव से पहले किया गया था। माना जा रहा है कि कैबिनेट की पहली बैठक में इस योजना के बजट, संरचना और लागू होने की दिशा में अहम निर्णय लिया जा सकता है।
हालांकि, पहली कैबिनेट मीटिंग नई सरकार के विकास एजेंडे की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है। चुनाव से पहले किए गए बड़े वादों—नई एक्सप्रेसवे परियोजनाओं, मेट्रो विस्तार, रेल आधुनिकीकरण और गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से कुछ प्रस्तावों पर तुरंत कार्रवाई शुरू होने की उम्मीद है। गया और दरभंगा मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट पर शुरुआती मंजूरी या डीपीआर तैयार करने का निर्णय भी संभव है। वहीं, मुफ्त राशन, 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं पर शुरुआती फैसले नीतीश सरकार की नई पारी को गति दे सकते हैं।