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बिहार सरकार ने राज्य के बुजुर्गों के सम्मान और सुविधा को ध्यान में रखते हुए जमीन रजिस्ट्री (Property Registration) की प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब राज्य के 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को जमीन की खरीद-बिक्री के लिए निबंधन कार्यालय (Registry Office) के चक्कर नहीं काटने होंगे। नई व्यवस्था के तहत, अवर निबंधक (Sub-Registrar) खुद बुजुर्गों के दरवाजे पर दस्तक देंगे और घर बैठे ही ऑनलाइन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कैसे काम करेगी ‘डोरस्टेप रजिस्ट्री’ की प्रक्रिया?
इस नई सुविधा को सुलभ बनाने के लिए सरकार ने बेहद सरल और पारदर्शी प्रक्रिया तैयार की है, जिसके तहत सबसे पहले आवेदक को ई-निबंधन पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जैसे ही पोर्टल पर आवेदक की उम्र 80 वर्ष या उससे अधिक दर्ज की जाएगी, सॉफ्टवेयर में स्वतः ही ‘घर से रजिस्ट्री’ का विकल्प उभर कर आएगा, जिसका चयन करने के बाद इस सेवा के लिए मात्र 400 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जमा करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होते ही निबंधन कार्यालय की टीम मोबाइल यूनिट (लैपटॉप, स्कैनर और बायोमैट्रिक मशीनों) के साथ तय समय पर सीधे बुजुर्ग के घर पहुंचेगी ताकि रजिस्ट्री का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया जा सके।
1 अप्रैल से शुरू होगी नई सेवा
मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग इस योजना को ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ अभियान के तहत लागू कर रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ई-निबंधन सॉफ्टवेयर को अपडेट करने का काम फरवरी के अंत तक पूरा हो जाएगा। मार्च में इसका ट्रायल (Trial) किया जाएगा और 1 अप्रैल 2026 से इसे पूरे राज्य में अनिवार्य रूप से लागू करने की तैयारी है।
पुरानी जटिलताओं से मिलेगा छुटकारा
अब तक की व्यवस्था में बीमार या लाचार बुजुर्गों के लिए ‘कमीशन’ की प्रक्रिया थी, जो काफी जटिल थी। इसमें मेडिकल सर्टिफिकेट देना पड़ता था और अधिकारी मैनुअल तरीके से कागजी कार्रवाई करते थे, जिसमें धोखाधड़ी की गुंजाइश बनी रहती थी। नई डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह से आधार कार्ड और बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन पर आधारित है, जिससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।
डिजिटल ईज ऑफ लिविंग का बड़ा कदम
रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होते ही खरीदार और विक्रेता दोनों के मोबाइल पर एक डिजिटल लिंक भेजा जाएगा। इस लिंक के जरिए जमीन के दस्तावेज (Deeds) कहीं भी और कभी भी ऑनलाइन डाउनलोड किए जा सकेंगे। यह पहल न केवल बुजुर्गों के लिए मददगार साबित होगी, बल्कि बिहार के राजस्व विभाग में पारदर्शिता और आधुनिकता का एक नया अध्याय भी जोड़ेगी।