पटना-बिहटा का सफर अब ‘हवाई’ अंदाज में, ₹1969 करोड़ के एलिवेटेड कॉरिडोर से जाम की समस्या होगी समाप्त!

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
राजधानी पटना के पश्चिमी छोर पर रहने वाले लाखों लोगों और बिहटा की ओर सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दानापुर-बिहटा-कोइलवर मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम के नर्क से अब हमेशा के लिए मुक्ति मिलने वाली है। ₹1969 करोड़ की लागत से बन रहा 25 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर अब तेजी से धरातल पर उतर रहा है। यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल बिहार के बुनियादी ढांचे की सूरत बदलेगा, बल्कि पटना से बिहटा की दूरी को मिनटों में समेट देगा।

जाम के ‘नर्क’ से परमानेंट आजादी
वर्तमान में दानापुर-बिहटा मार्ग अपनी संकरी सड़कों और अनियंत्रित जाम के लिए कुख्यात है। स्थानीय निवासी हों, कार्यालय जाने वाले कर्मचारी या एम्बुलेंस में फंसे मरीज—घंटों का इंतजार इस रूट की नियति बन चुकी थी। नए एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से स्थानीय ट्रैफिक नीचे की सड़कों पर चलेगा, जबकि लंबी दूरी के वाहन ऊपर से फर्राटा भरेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि दुर्घटनाओं में भी भारी कमी आएगी।

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NHAI की इंजीनियरिंग और चुनौतियां
घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस विशालकाय पुल का निर्माण करना एनएचएआई (NHAI) के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। परियोजना निदेशक अरबिन्द कुमार के अनुसार, शहरी फैलाव और सीमित स्थान के बीच मौजूदा ट्रैफिक को बिना बाधित किए पिलर खड़े करना एक बड़ी उपलब्धि है। आधुनिक सुरक्षा मानकों और इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करते हुए इस कॉरिडोर को ‘सिग्नल-फ्री’ बनाया गया है, जो ईंधन की खपत और प्रदूषण को कम करने में भी सहायक होगा।

विकास की ‘ग्रीन चैनल’ बनेगा यह कॉरिडोर
यह परियोजना केवल एक सड़क नहीं, बल्कि बिहार के आर्थिक विकास की नई जीवनरेखा है। बिहटा में स्थित आईआईटी (IIT), ईएसआईसी (ESIC) अस्पताल और प्रस्तावित एयरपोर्ट के कारण इस कॉरिडोर का महत्व दोगुना हो जाता है। बेहतर कनेक्टिविटी से बिहटा और आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट, नए उद्योगों और शिक्षण संस्थानों का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

भविष्य की तस्वीर: आधुनिक बिहार
पटना-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर का पूरा होना बिहार के बदलते बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का सबसे बड़ा प्रमाण है। कोइलवर तक पहुँचने के लिए अब लोगों को ट्रैफिक के बीच संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। यह मार्ग व्यापारिक वाहनों के लिए एक ‘ग्रीन चैनल’ के रूप में काम करेगा, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच माल ढुलाई भी सुगम हो जाएगी।

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