मुरेठा वाले मुख्यमंत्री: कौन हैं सम्राट चौधरी, जिन्होंने नीतीश को हटाने की कसम खाकर जीत ली बिहार की कुर्सी?…

Ritu Raj

बिहार की सियासत में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। कभी नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने के लिए सिर पर मुरेठा (पगड़ी) बांधकर संकल्प लेने वाले सम्राट चौधरी अब खुद बिहार की कमान संभालने जा रहे हैं। भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद, वे राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।

विरासत और व्यक्तिगत परिचय;
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को खगड़िया में एक कद्दावर राजनीतिक परिवार में हुआ। उनके पिता, शकुनी चौधरी, बिहार के दिग्गज समाजवादी नेताओं में गिने जाते हैं, जो सात बार विधायक और सांसद रहे। उनकी माता पार्वती देवी भी तारापुर से दो बार विधायक रहीं। राजनीति उन्हें विरासत में मिली, लेकिन अपनी पहचान उन्होंने अपने आक्रामक तेवरों से बनाई।

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राजद से शुरुआत;
सम्राट चौधरी ने अपना सियासी सफर लालू प्रसाद यादव की आरजेडी से शुरू किया। 1999 में राबड़ी देवी सरकार में उन्हें कृषि राज्य मंत्री बनाया गया था। हालांकि, उस समय उनकी उम्र को लेकर काफी कानूनी विवाद हुआ, जिसके कारण उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था।

जदयू से भाजपा तक का राजनीतिक बदलाव;
वह परबत्ता से दो बार विधायक रहे और नीतीश कुमार व जीतन राम मांझी की सरकारों में भी मंत्री पद संभाला। लेकिन 2018 में उनका भाजपा में शामिल होना उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। भाजपा में उनकी सक्रियता और सांगठनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद विधान परिषद (MLC) भेजा गया। फिर 2023 में बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

मुरेठा संकल्प;
सम्राट चौधरी की सबसे चर्चित पहचान उनका मुरेठा बना। महागठबंधन सरकार के दौरान उन्होंने कसम खाई थी कि जब तक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से नहीं हटाएंगे, वे अपनी पगड़ी नहीं खोलेंगे। हालांकि, राजनीति की बिसात पर जब नीतीश कुमार वापस NDA में आए, तो सम्राट चौधरी ने अयोध्या जाकर सरयू नदी में अपना मुरेठा विसर्जित किया और गठबंधन की मर्यादा को सर्वोपरि रखा।

भाजपा का बड़ा ओबीसी (OBC) चेहरा;
कोइरी (कुशवाहा) समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को भाजपा ने बिहार में अपने सबसे मजबूत पिछड़ा वर्ग नेता के रूप में पेश किया है। मात्र 8 वर्षों के भीतर भाजपा के शीर्ष तक पहुंचना उनकी राजनीतिक कुशलता का प्रमाण है।

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