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बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य की राजनीति में ‘जोड़-तोड़’ और ‘सेंधमारी’ के खेल को चरम पर पहुंचा दिया है। 5 मार्च को नामांकन की आखिरी तारीख है, लेकिन असली सस्पेंस 5वीं सीट को लेकर बना हुआ है। जहां एनडीए अपनी संख्या बल के आधार पर 4 सीटें आसानी से जीतती दिख रही है, वहीं 5वीं सीट के लिए वह महागठबंधन के खेमे में सेंध लगाने की पूरी तैयारी में है।
कुशवाहा की पार्टी का विलय और बीजेपी की ‘भारी शर्त’
सबसे दिलचस्प चर्चा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को लेकर है। कुशवाहा के पास महज 4 विधायक हैं, जिनके दम पर राज्यसभा जाना नामुमकिन है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने को तैयार है, लेकिन इसके बदले एक ‘भारी कीमत’ मांगी गई है। शर्त यह है कि कुशवाहा अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दें। इससे बीजेपी के विधायकों की संख्या 89 से बढ़कर 93 हो जाएगी। यदि कुशवाहा तैयार होते हैं, तो उन्हें केंद्र में मंत्री पद और उनके विधायकों को राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
चिराग पासवान की ‘मुराद’ और 5वीं सीट का गणित
यदि उपेंद्र कुशवाहा का मामला सुलझता है, तो एनडीए 5वीं सीट पर चिराग पासवान की मां रीना पासवान को उतारने पर विचार कर सकता है। चिराग लंबे समय से अपनी मां के लिए राज्यसभा सीट की उम्मीद लगाए हुए हैं। एनडीए को 5वीं सीट जीतने के लिए केवल 3 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है, जिसके लिए विपक्षी गठबंधन (महाठबंधन) के बागी विधायकों और निर्दलीयों पर नजर गड़ा दी गई है।
जेडीयू में ‘निशांत’ की चर्चा और रामनाथ ठाकुर पर सस्पेंस
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में भी बड़े बदलाव के संकेत हैं:
हरिवंश की छुट्टी? राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को इस बार मौका मिलने की उम्मीद कम है।
निशांत कुमार की एंट्री? सियासी गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत को राज्यसभा भेजकर सबको चौंका सकते हैं।
रामनाथ ठाकुर: कर्पूरी ठाकुर के पुत्र होने और अति पिछड़ा कार्ड के कारण उन्हें रिपीट किया जा सकता है, या फिर संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
लालू यादव का ‘प्लान-B’ और ओवैसी का साथ
विपक्ष की ओर से लालू प्रसाद यादव 5वीं सीट को हाथ से जाने नहीं देना चाहते। महागठबंधन के पास अभी 35 वोट हैं और जीत के लिए 41 चाहिए। लालू यादव की नजर AIMIM के 5 विधायकों और बसपा के इकलौते विधायक पर है। चर्चा है कि यदि महागठबंधन किसी मुस्लिम चेहरे को उम्मीदवार बनाता है, तो ओवैसी की पार्टी का समर्थन मिलना आसान हो जाएगा। 6 मार्च को नामांकन की प्रक्रिया खत्म होगी, लेकिन उससे पहले 4 मार्च को होली के रंग में सियासी जोड़-तोड़ का गुलाल खूब उड़ने वाला है।