कौन हैं विजय चौधरी और विजेंद्र यादव? जिन्हें नीतीश के ‘खास’ से सीधे मिला डिप्टी सीएम का पद, बैंक की नौकरी से सत्ता के शिखर तक की पूरी कहानी!..

Ritu Raj

बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। राज्य में नवगठित भाजपा-जदयू गठबंधन की सरकार में सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली है। इस नई सरकार में सत्ता का संतुलन साधते हुए जदयू कोटे से दो कद्दावर नेताओं, विजय चौधरी और विजेंद्र यादव, को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। बुधवार को राजभवन (लोकभवन) में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने इन सभी नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

1) विजय चौधरी: सौम्य व्यक्तित्व और कुशल रणनीतिकार
विजय चौधरी बिहार की राजनीति का वह चेहरा हैं जिन्हें उनकी विद्वता और संतुलित व्यवहार के लिए जाना जाता है।
पृष्ठभूमि और शिक्षा: 8 जनवरी 1957 को समस्तीपुर में जन्मे विजय चौधरी को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता जगदीश प्रसाद चौधरी अपने समय के दिग्गज नेता थे। विजय चौधरी ने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर (MA) किया और राजनीति में आने से पहले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में अधिकारी के रूप में कार्य किया।
राजनीतिक सफर: पिता के निधन के बाद उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वे दलसिंहसराय से तीन बार विधायक रहे। 2005 में कांग्रेस छोड़ जदयू में शामिल होना उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ रहा।
विशेषता: भूमिहार समाज से आने वाले विजय चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद साथियों में गिने जाते हैं। वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी साफ-सुथरी छवि और विधायी कार्यों के गहरे ज्ञान के कारण उन्हें अब उपमुख्यमंत्री की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

2) विजेंद्र यादव: कोसी के ‘चाणक्य’ और विकास के पर्याय
79 वर्ष की आयु में भी विजेंद्र प्रसाद यादव की राजनीतिक ऊर्जा युवाओं को मात देती है। उन्हें कोसी क्षेत्र की राजनीति का ‘चाणक्य’ माना जाता है।
अपराजेय रिकॉर्ड: विजेंद्र यादव का प्रभाव ऐसा है कि वे साल 1990 से लगातार सुपौल विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। क्षेत्र की जनता के बीच उनकी पकड़ और प्रशासनिक अनुभव बेमिसाल है।
ऊर्जा क्रांति के प्रणेता: कोसी क्षेत्र (सुपौल, सहरसा, मधेपुरा) की तस्वीर बदलने का श्रेय उन्हें जाता है। बिजली मंत्री के रूप में उन्होंने ग्रिड नेटवर्क का विस्तार किया और उप-केंद्रों का जाल बिछाया, जिससे बाढ़ प्रभावित यह इलाका ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना।
भूमिका: नीतीश कुमार के कोर ग्रुप के सदस्य होने के साथ-साथ वे पार्टी के वरिष्ठतम रणनीतिकारों में से एक हैं। यादव समाज में उनकी गहरी पैठ और कोसी क्षेत्र में उनके दबदबे को देखते हुए उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।

Share This Article