बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रिकॉर्ड तोड़ मतदान के बाद अब सबकी निगाहें मतगणना पर टिकी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वोटों की गिनती के दौरान काउंटिंग सेंटर के अंदर माहौल कैसा होता है और वहां कौन जा सकता है? मतगणना केंद्र पूरी तरह सुरक्षा घेरे में होते हैं, जहां सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को ही प्रवेश की अनुमति मिलती है। चुनाव आयोग ने इसके लिए कड़े नियम तय किए हैं ताकि गिनती की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे। आइए जानते हैं, काउंटिंग सेंटर में किन लोगों को इजाजत मिलती है और इसके क्या-क्या नियम लागू होते हैं।
काउंटिंग सेंटर में मतगणना प्रक्रिया बेहद व्यवस्थित तरीके से होती है। आमतौर पर एक हॉल में 14 टेबल वोटों की गिनती के लिए और 1 टेबल रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के लिए लगाई जाती है। यानी कुल 15 टेबल होती हैं। जरूरत पड़ने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आदेश पर टेबलों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। प्रत्येक उम्मीदवार के अधिकतम 15 एजेंट एक हॉल में मौजूद रह सकते हैं। वहीं, हर टेबल पर एक एजेंट और एक एजेंट रिटर्निंग ऑफिसर (RO) की टेबल पर बैठता है। इन एजेंटों की जिम्मेदारी होती है गिनती की प्रक्रिया पर नजर रखना और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत आपत्ति दर्ज कराना ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
दरअसल, इसलिए मतगणना केंद्रों पर पूरी प्रक्रिया बेहद व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से की जाती है। चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि हर वोट की गिनती पारदर्शी और निष्पक्ष हो। चाहे विधानसभा क्षेत्र हो या संसदीय, हर जगह सुरक्षा, निगरानी और गोपनीयता के सख्त नियम लागू रहते हैं, ताकि लोकतंत्र के इस महापर्व का नतीजा पूरी ईमानदारी और भरोसे के साथ सामने आ सके।