बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, सियासी सरगर्मी चरम पर है। नेताओं के भाषण, रैलियां और प्रचार के बीच असली तैयारी मैदान के पीछे भी चल रही है वो है चुनाव ड्यूटी की तैनाती। आखिर कैसे तय होती है कि कौन अधिकारी किस बूथ पर ड्यूटी देगा, और मतदान के दिन एक बूथ पर कौन-कौन मिलकर चुनाव प्रक्रिया को सुचारू बनाते हैं? आइए जानते हैं चुनाव के इस “अनदेखे मैनेजमेंट” की पूरी कहानी। चुनाव ड्यूटी कैसे सौंपी जाती है।
चुनाव ड्यूटी के आवंटन की पूरी जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी (District Election Officer) की होती है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि पूरे जिले में मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और पूरी तरह तटस्थ तरीके से संपन्न हो। सबसे पहले, चुनावी कार्यबल तैयार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्थानीय निकायों के कर्मचारियों की सूची बनाई जाती है। इन कर्मचारियों में से ही मतदान अधिकारी चुने जाते हैं। हर मतदान केंद्र पर एक पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) और उनके साथ मतदान अधिकारियों (Polling Officers) की टीम तैनात की जाती है। मतदान केंद्र के आकार और वहां के मतदाताओं की संख्या के अनुसार टीम का आकार तय किया जाता है। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अधिकारियों की तैनाती कंप्यूटराइज्ड रेंडमाइजेशन सिस्टम से की जाती है। इस प्रक्रिया में किसी भी कर्मचारी को यह पहले से नहीं पता होता कि उसकी ड्यूटी किस क्षेत्र या बूथ पर लगेगी। इससे किसी तरह की मिलीभगत, पक्षपात या बाहरी दबाव की संभावना खत्म हो जाती है। साथ ही, जो व्यक्ति किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार से जुड़ा हुआ हो, उसे चुनावी ड्यूटी के लिए पात्र नहीं माना जाता। वहीं, मतदान दिवस से पहले सभी अधिकारियों को एक विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें उन्हें EVM और VVPAT मशीनों के संचालन, मतदान प्रक्रिया के चरणों, और आपात स्थितियों से निपटने के प्रोटोकॉल की जानकारी दी जाती है। प्रशिक्षण के बाद ही वे मतदान केंद्रों पर ड्यूटी के लिए अधिकृत होते हैं।
मतदान केंद्र पर जिम्मेदारियों का बंटवारा:
मतदान केंद्र पर हर अधिकारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। पीठासीन अधिकारी पूरे केंद्र के प्रभारी होते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार पूरी हो। वे मतदाता सूची, मतपत्र, EVM की कार्यप्रणाली और मतदान के दौरान आने वाली तकनीकी या प्रक्रियात्मक समस्याओं की निगरानी करते हैं। मतदान समाप्त होने के बाद वही सभी मतदान सामग्री और रिपोर्ट रिटर्निंग ऑफिसर को सौंपते हैं।
पीठासीन अधिकारी की सहायता के लिए आमतौर पर तीन मतदान अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं:
– पहला मतदान: अधिकारी मतदाता सूची का प्रबंधन करता है और मतदाता की पहचान की जांच कर उन्हें मतदान के लिए आगे बढ़ने की अनुमति देता है।
– दूसरा मतदान: अधिकारी मतदाता की उंगली पर स्याही लगाता है और मतदान पर्ची जारी करता है या ईवीएम की कंट्रोल यूनिट का संचालन करता है।
– तीसरा मतदान: अधिकारी सुनिश्चित करता है कि मतदाता ने सही ढंग से अपना वोट डाला हो और मतदान केंद्र की व्यवस्था बनी रहे।
इन अधिकारियों के अलावा, केंद्र पर सहायक कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी मौजूद रहते हैं जो कतारों का प्रबंधन, दिव्यांग या बुजुर्ग मतदाताओं की मदद, और मतदान केंद्र की समग्र व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, पुलिस और अर्धसैनिक बल मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का दायित्व संभालते हैं ताकि लोकतंत्र का यह उत्सव बिना किसी व्यवधान के संपन्न हो सके।