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गुरु दक्षिणा की परंपरा शदियों पुरानी है। गुरु दक्षिणा गुरु के प्रति सम्मान व समर्पण भाव है। गुरु के प्रति सही दक्षिणा यही है कि गुरु अब चाहता है कि तुम खुद गुरु बनो। मूलतः गुरु दक्षिणा का अर्थ शिष्य की परीक्षा के संदर्भ में भी लिया जाता है। गुरु दक्षिणा उस वक्त दी जाती है या गुरु उस वक्त दक्षिणा लेता है जब शिष्य में संपूर्णता आ जाती है। अर्थात जब शिष्य गुरु होने लायक स्थिति में होता है। गुरु के पास का समग्र ज्ञान जब शिष्य ग्रहण कर लेता है और जब गुरु के पास कुछ भी देने के लिए शेष नहीं रह जाता तब गुरु दक्षिणा सार्थक होती है।
मुकेश अंबानी के 151 करोड़ रु गुरु दक्षिणा के बाद क्यों चर्चा में आए बिहार के चर्चित शिक्षक Rk Shrivastava
जब अंबानी ने अपने गुरु को दिया 151 करोड़ रु गुरु दक्षिणा तो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए “1 रु गुरु दक्षिणा” में पढ़ाकर सैकड़ों से अधिक आर्थिक रूप से गरीब स्टूडेंट्स को IITIAN बनाने वाले चर्चित शिक्षक आरके श्रीवास्तव,
देश के सबसे बड़े उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने एक बार फिर दरियादिली दिखाई है। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई को 151 करोड़ रुपये बिना शर्त अनुदान दिया है। आपको बता दें कि मुकेश अंबानी ने यही से 1970 के दशक में स्नातक किया था। मुकेश अंबानी ने प्रोफेसर एमएम शर्मा की जीवनी ‘डिवाइन साइंटिस्ट’ के प्रकाशन के लिए आयोजित समारोह के दौरान ईसीटी में तीन घंटे से अधिक समय बिताया- जिसे उस समय यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (यूडीसीटी) कहा जाता था। अंबानी ने स्पष्ट किया कि ₹151 करोड़ का यह दान उनके लिए ‘गुरु दक्षिणा’ है, जो उन्होंने प्रोफेसर शर्मा के निर्देशानुसार दी है।
अंबानी के गुरु दक्षिणा देते ही viral हो गए ” एक रु गुरु दक्षिणा” में पढ़ाने वाले शिक्षक

भारत के प्रसिद्ध शिक्षक आरके श्रीवास्तव, जो सिर्फ 1 रु गुरु दक्षिणा में पढाकर IITian बनाने के लिए प्रसिद्ध पा चुके है। इनके इस नेक कार्य हेतु राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी राष्ट्रपति भवन में सम्मान और आशीर्वाद इस बिहारी शिक्षक को मिल चुका है।राष्ट्रपति के साथ कि तस्वीरे सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे है।आरके श्रीवास्तव का नाम “वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स” और “इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स” में भी दर्ज हो चुका है।
दुनिया के मानचित्र पर पटना (बिहार) के मैथेमेटिक्स गुरु आर.के. श्रीवास्तव का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इनका पूरा नाम रजनी कांत श्रीवास्तव है। ये भारत के एक मात्र ऐसे शिक्षक होंगे जिनका कोई हेटर्स नहीं मिलेगा,जिन्होंने देश के हर उस बच्चे की मदद करने की सोची जो पढ़ना चाहता है। इन्होंने सिर्फ 1 रु फीस में पढाकर 950 से अधिक स्टूडेंट्स को इंजीनियर बना चुके है। भारत के प्रतिष्ठित अखबारों और न्यूज पोर्टल पर इनके बारे में खबरें हमेशा छपती ही रहती है। Google पर सिर्फ मैथेमेटिक्स गुरु सर्च करने भर से ही सबसे टॉप पर Rk Shrivastava sir का नाम सामने आ जाता है। आरके श्रीवास्तव गरीब छात्रों को IIT की 1 रु में कोचिंग क्लास देते हैं। वे एक गणितज्ञ होने के साथ-साथ एक अच्छे शिक्षक भी हैं। आरके श्रीवास्तव एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने गरीब छात्रों को मुफ्त में शिक्षा देकर उनकी काबिलियत को समझा है।आरके श्रीवास्तव ने सिर्फ 1 रु गुरु दक्षिणा में पढाकर निर्धन स्टूडेंट्स के सपने को साकार कर रहे है।