बेगूसराय में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच से अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे थे और भीड़ ने मैदान छोड़ना शुरू कर दिया।
मंच से दिखी मुख्यमंत्री की तल्खी;
जैसे ही मुख्यमंत्री ने भाषण देना शुरू किया, पंडाल में बैठी महिलाओं और अन्य लोगों ने धीरे-धीरे बाहर निकलना शुरू कर दिया। भीड़ को छंटता देख नीतीश कुमार अपना आपा खो बैठे और उन्होंने सीधे माइक से ही टोकना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि “काहे भाग रही है… तो हम बंद कर दें? देखिए न उधर कैसे दो-चार गो भाग रहा है।” सीएम की इस सीधी फटकार के बाद भगदड़ जैसी स्थिति रुकी और लोग वापस अपनी जगहों पर खड़े होकर उन्हें सुनने लगे।
‘जंगलराज’ बनाम ‘सुशासन’ का जिक्र;
गुस्से के बाद मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2005 से पहले के बिहार की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उनके सत्ता संभालने से पहले शाम के बाद लोग घरों से निकलने में डरते थे। राज्य में भय का माहौल खत्म कर शांति स्थापित की गई। जीविका दीदियों और आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को मुख्यधारा में लाया गया। बिहार के किसी भी कोने से अब पटना पहुंचना बेहद आसान हो गया है। बेगूसराय में बड़े पैमाने पर निवेश को उन्होंने अपनी सरकार की बड़ी सफलता बताया।
“डबल इंजन” की ताकत पर जोर;
कार्यक्रम में मौजूद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज बिहार “डबल इंजन” सरकार (मोदी और नीतीश) के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उनके अनुसार, बिहार आज विकास के उस पायदान पर है जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर प्रदेश की तस्वीर बदल रहे हैं।