टीना डाबी को ‘रील स्टार’ कहने पर स्टूडेंट्स क्यों हुए ट्रोल, जानें क्या है कानूनी सजा!…

Ritu Raj

आईएएस अधिकारी टीना डाबी, जो वर्तमान में बाड़मेर की कलेक्टर हैं, इन दिनों काफी चर्चों में हैं। बाड़मेर में कॉलेज फीस बढ़ोतरी के विरोध के दौरान कुछ छात्राओं ने कलेक्टर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि वह कोई रोल मॉडल नहीं बल्कि ‘रील स्टार’ हैं। इस बयान के बाद छात्राओं को पुलिस हिरासत में ले लिया गया, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या किसी अधिकारी को ‘रील स्टार’ कह देना कानूनन अपराध है और इसे लेकर हिरासत में लिया जा सकता है। आइए जानते हैं पूरी कहानी और कानूनी पहलू।

दरअसल, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ‘रील स्टार’ शब्द का क्या मतलब है। छात्राओं ने इस शब्द का इस्तेमाल कलेक्टर टीना डाबी की प्रशासनिक कामकाज की बजाय सोशल मीडिया पर अधिक दिखाई देने की प्रवृत्ति पर तंज कसने के लिए किया था। वहीं, कानून की दृष्टि से किसी सरकारी अधिकारी की आलोचना करना या उनके काम पर सवाल उठाना अपराध नहीं है। भारतीय संविधान की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत किसी भी सरकारी अधिकारी की सार्वजनिक आलोचना करना वैध है। लेकिन इसमें एक शर्त यह है कि यह आलोचना किसी कानूनी सीमा का उल्लंघन न करे। हालांकि, असल में कानूनी समस्या तब आती है जब किसी टिप्पणी का मकसद या तरीका ऐसा हो जो कानून का उल्लंघन करे, जैसे धमकी देना, भड़काना या किसी अधिकारी के अधिकारों में बाधा डालना। साधारण आलोचना या व्यंग्य पर किसी को आपराधिक जिम्मेदारी नहीं बनाई जा सकती।

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हालांकि, ऐसे मामलों में कानून का उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और सरकारी कामकाज में बाधा डालने से रोकना होता है। अगर किसी की टिप्पणी या विरोध प्रदर्शन सड़कें ब्लॉक कर रहा है, सार्वजनिक सेवाओं में रुकावट डाल रहा है, या किसी अधिकारी को उनके सरकारी कर्तव्यों से रोक रहा है, तो पुलिस सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर सकती है। इसके साथ ही, यदि कोई बयान झूठे आरोपों के माध्यम से किसी अधिकारी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से दिया गया है, तो अधिकारी मानहानि (defamation) का मामला दायर कर सकते हैं। इन परिस्थितियों में आमतौर पर जेल जाने का प्रावधान नहीं होता। पुलिस अधिकतर मामलों में कुछ घंटे की हिरासत के बाद आरोपी को बॉन्ड पर छोड़ देती है, ताकि स्थिति शांत रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। कुल मिलाकर, जब तक विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और गंभीर हिंसा या दुर्व्यवहार नहीं हुआ है, लंबे समय की जेल या कड़ी सजा का खतरा नहीं होता। इसका मकसद केवल कानून और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना होता है, न कि साधारण आलोचना पर कार्रवाई करना।

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