: हेमंत सोरेन सरकार के हाथ में योगी आदित्यनाथ का ‘हथियार’, JMM का BJP पर पलटवार
सिटी पोस्ट लाइव : झारखण्ड के डीजीपी के पद पर IPS अनुराग गुप्ता को बिठाए जाने का विवाद टूल पकड़ता जा रहा है. 1990 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अनुराग गुप्ता वर्तमान में झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर कार्यरत हैं. इनके कार्यकाल में झारखंड पुलिस को कई सफलाएं भी मिली हैं. नक्सल के क्षेत्र, संगठित अपराध और साइबर अपराध.के मामले में उनके कार्यकाल में बहुत बड़ी बड़ी उपलब्धियां मिली हैं.लेकिन बीजेपी उनकी नियुक्ति को लेकर सवाल उठा रही है.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मारंडी का कहना है कि प्रदेश में आईपीएस अफसरों की कमी नहीं, लेकिन सरकार नियमों को ताक पर रखने का काम कर रही है. खास तौर से तब जब केंद्र सरकार ने इसे लेकर पत्राचार भी किया है और डीजीपी अनुराग गुप्ता के सेवानिवृति की जानकारी भी साझा करते हुए अवगत कराया गया है. 30 अप्रैल के बाद से ही राज्य डीजीपी विहीन है और असंवैधानिक तौर पर डीजीपी के पद पर अनुराग गुप्ता को बिठा रखा है.
लेकिन इस मामले पर सरकार ने बीजेपी को कठघरे में खड़ा किया है. झारखंड सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी गई है. 30 अप्रैल की शाम मुख्य सचिव ने अपनी अपनी रिपोर्ट में डीजीपी की नियुक्ति को उचित बताया गया है.रिपोर्ट में कैबिनेट में लिए गए निर्णय और गठित समिति की अनुशंसा का जिक्र किया है. बता दें कि इस मामले में 22 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया था जिसमें डीजीपी की नियुक्ति पर रिपोर्ट मांगी गई थी. इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबू लाल मरांडी ने डीजीपी अनुराग गुप्ता के बहाने वर्तमान प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की.
सत्ता पक्ष का कहना है राज्य सरकार के द्वारा पूर्व में भी डीजीपी की बहाली प्रक्रिया को लेकर कैबिनेट में प्रस्ताव पारित किया गया था. तीन सदस्यीय टीम भी बनाई गई थी और उसी के आधार पर डीजीपी का चयन किया गया है. मामले पर सत्ता पक्ष का कहना है कि झारखंड सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करने के लिए 3 सदस्यीय समिति बनाई गई है जिसमें गृह विभाग के अधिकारी और रिटायर्ड जज भी शामिल हैं.इसी के आधार पर वैधानिक तौर पर डीजीपी को नियुक्त किया गया है.
गौरतलब है कि ये समिति यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के बनाए गए नियमों के तहत तर्ज पर बनाई गई है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकारने भी डीजीपी नियुक्ति के लिए इस तरह की समिति बनाई गई है, जिसे लेकर सत्ता पक्ष बीजेपी के ऊपर हमलावर है. सत्ता पक्ष का तर्क है कि आखिर बीजेपी एक प्रदेश में उसी नियम को समर्थन करती है और जब झारखंड में यूपी की तरह ही हमने फैसले लिए तो इसका विरोध करती है. यह दोहरा मानदंड है.