बिहार: अपहृत HAM पार्टी के नेता राकेश कुमार का शव 5 दिन बाद 5 फीट गहराई में गड़ा मिला, परिजनों ने शव लेने से किया इनकार

Deepak Sharma

“बिहार में पुलिस की नई पॉलिसी दफन लाश, दबा सच!”

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र से पांच दिन पहले अगवा किए गए हम पार्टी के युवा नेता राकेश कुमार उर्फ विकास का शव बुधवार को बरामद किया गया। शव को मुंगेर जिले के जफरनगर पंचायत स्थित फूल मलिक दियारा इलाके में खेत के अंदर करीब 5 फीट गहराई में दफनाया गया था। ग्रामीणों ने खेत में एक हाथ बाहर निकला हुआ देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

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सूचना मिलते ही मुंगेर मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को मिट्टी से बाहर निकाला। शव की स्थिति को देखते हुए पुलिस को आशंका है कि शनिवार की रात ही राकेश की हत्या कर दी गई थी और उसके बाद शव को दफना दिया गया।

हालांकि, शव मिलने के बाद राकेश के परिजनों ने शव की पहचान से इनकार कर दिया। उनके मुताबिक, यह शव उनके बेटे राकेश का नहीं है। राकेश के पिता इंद्रदेव साह ने आरोप लगाया कि पुलिस मुख्य आरोपी डब्लू यादव को बचाने की कोशिश कर रही है और सच्चाई छुपा रही है। उनका कहना है कि “असल अपराधियों को पकड़कर पूछताछ की जाए कि राकेश कहां है।” घटना शनिवार शाम 7:30 बजे की है, जब संदलपुर गांव से अपराधियों ने हथियार के बल पर राकेश का अपहरण कर लिया। अपराधी फायरिंग करते हुए उसे दियारा क्षेत्र की ओर ले गए थे। तभी से पुलिस की टीमें उसकी तलाश कर रही थीं।

राकेश के पिता की शिकायत पर पुलिस ने 12 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जिनमें मुख्य आरोपी डब्लू यादव, उसकी पत्नी सरपंच सीता देवी, रोशन कुमार, उमा यादव, राजीव यादव, टीकर यादव, रॉबिन यादव, परशुराम कुमार, सतीश यादव, गौरव कुमार और उसकी मां रानी देवी शामिल हैं। सीता देवी और रानी देवी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। बुधवार को कोर्ट के आदेश पर डब्लू यादव के घर पर बुलडोजर चलाकर कुर्की और जब्ती की कार्रवाई की गई।

पुलिस ने बताया कि शव की अंतिम पुष्टि डीएनए जांच के जरिए की जाएगी। शव को पोस्टमार्टम के बाद सुरक्षित रखा गया है। जांच के बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि शव राकेश कुमार का ही है या नहीं। यह मामला न केवल एक राजनैतिक व्यक्ति के अपहरण और हत्या से जुड़ा है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या पुलिस सच्चाई उजागर कर रही है, या मुख्य आरोपियों को बचाने की कोशिश हो रही है। अब पूरे मामले की सच्चाई डीएनए रिपोर्ट और आगे की जांच पर निर्भर करेगी।

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