रेप केस में दोषी भाजपा के पूर्व विधायक को राहत, उम्रकैद की सजा निलंबित…

Ritu Raj

उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए गए भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाईकोर्ट ने निलंबित कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के विरोध में रेप पीड़िता अपनी मां और एक अन्य महिला के साथ दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गईं, जहां पुलिस ने तीनों को डिटेन कर लिया। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।

उन्नाव रेप मामला साल 2017 का है। आरोप है कि तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके सहयोगियों ने 17 वर्षीय नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस गंभीर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच पूरी होने के बाद 20 दिसंबर 2019 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी और आदेश दिया था कि उसे मृत्यु तक जेल में रखा जाए। इसके अलावा कोर्ट ने उस पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। हालांकि, इस केस के दौरान पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा। पीड़िता के परिवार के कई सदस्यों की एक के बाद एक संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिससे मामला और अधिक गंभीर हो गया। न्याय की मांग करते हुए पीड़िता ने एक बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास भी किया था, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया था।

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दरअसल, मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी ठहराया, जिसके बाद केस को सुरक्षा कारणों से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित किया गया। अब मंगलवार को आए ताजा आदेश में अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया है, जिससे यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। हालिया घटनाक्रम में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा भुगत रहे कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत दी है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने सेंगर की अपील पर अंतिम फैसले तक सजा निलंबित करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उसे 15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत भी प्रदान की।

बता दें कि कोर्ट ने जमानत के साथ चार कड़ी शर्तें तय की हैं। आदेश के मुताबिक सेंगर को पीड़िता से कम से कम पांच किलोमीटर की दूरी बनाए रखनी होगी। उसे हर सोमवार को संबंधित थाने में उपस्थित होकर हाजिरी देनी होगी। साथ ही अपना पासपोर्ट संबंधित प्राधिकरण के पास जमा कराना अनिवार्य होगा, ताकि वह देश से बाहर न जा सके। अदालत ने साफ किया है कि किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत स्वतः निरस्त मानी जाएगी। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद रेप पीड़िता और उसके परिवार ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। गौरतलब है कि सजा सुनाए जाने के बाद सेंगर की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी और भाजपा ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब सजा निलंबन के आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

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