पटना के सेंट कैरेंस जैसे नामी स्कूल की पढ़ाई, मां एक शिक्षिका और पिता का हार्डवेयर का कारोबार- तौसीफ रजा उर्फ बादशाह की जिंदगी की शुरुआत किसी अपराधी की तरह नहीं हुई थी। लेकिन कम समय में बेतहाशा दौलत और पावर हासिल करने की सनक ने उसे अपराध की उस गहरी खाई में धकेल दिया, जहां से वापसी का रास्ता सिर्फ जेल की सलाखों तक जाता है।

तौसीफ से ‘बादशाह’ बनने का खूनी सफर;
तौसीफ रजा के पिता उसे एक नेक इंसान बनाना चाहते थे, इसलिए उसे शहर के महंगे स्कूल में पढ़ाया। लेकिन तौसीफ की नजरें ‘चकाचौंध’ पर थीं। बिल्डर बनने का सपना देखने वाला यह युवक जल्द ही सुपारी किलर बन गया। जुलाई 2005 की वो खौफनाक सुबह: पटना के पारस अस्पताल में तौसीफ अपने गैंग के साथ हथियारों से लैस होकर घुसा। उसका निशाना था गैंगस्टर चंदन मिश्रा। तौसीफ ने खुद टीम को लीड किया और कमरे में घुसकर दनादन फायरिंग कर चंदन मिश्रा को मौत के घाट उतार दिया। वहीं, दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने पटना पुलिस को हिला कर रख दिया था। वारदात के बाद तौसीफ फिल्मी अंदाज में फरार हो गया, जिसे काफी मशक्कत के बाद कोलकाता से गिरफ्तार किया गया।

कानून को ठेंगा दिखाता गैंगस्टर;
फिलहाल तौसीफ बेऊर जेल में बंद है, लेकिन उसका ‘दुस्साहस’ कम नहीं हुआ है। हाल ही में सोशल मीडिया पर उसके नाम से बने अकाउंट्स ने पुलिस की नींद उड़ा दी है। दरअसल, तौसीफ के अकाउंट से ऐसे वीडियो पोस्ट किए गए हैं जिनमें वह पटना सिविल कोर्ट में हथकड़ी पहने हुए टशन में चल रहा है। बता दें कि वीडियो के पीछे “हई जिले का बाहुबली… चला देब गोली त केहू ना बोली” जैसे गाने बज रहे हैं, जो सीधे तौर पर कानून को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। अपराध के साथ-साथ तौसीफ ने राजनीति में भी पैर जमाने की कोशिश की। उसने राजनीतिक रसूख बढ़ाकर शहर में अपने नाम के बैनर-पोस्टर तक लगवा दिए थे। हालांकि, यह मामला बिहार में ‘क्राइम और सोशल मीडिया’ के खतरनाक गठजोड़ को उजागर करता है, जहां जेल में रहने के बावजूद अपराधी अपनी दहशत को डिजिटल माध्यमों से जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं।