बिहार में CBI का बड़ा प्रहार: रेलवे घूसकांड का भंडाफोड़, 45 लाख नकदी के साथ नामी कंपनी के MD समेत 4 गिरफ्तार

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रेलवे परियोजनाओं में चल रहे विशाल रिश्वतखोरी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। गुरुवार को पटना के महेंद्रूघाट स्थित पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के निर्माण कार्यालय और रोहतास सहित देश के 12 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में CBI ने 45 लाख रुपये की नकदी बरामद की है और एक नामी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

बड़े नेटवर्क का खुलासा: MD से लेकर अकाउंटेंट तक गिरफ्त में
CBI ने इस मामले में ‘एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड’ के प्रबंध निदेशक अनूप सिंह, सहायक महाप्रबंधक गौरव कुशवाहा, अकाउंटेंट आकाश पात्रा और धीरज विरमानी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) अनिल कुमार सहित 11 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है।

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कैसे हुआ घूसखोरी का खुलासा?
जानकारी के अनुसार, रेलवे के निर्माण कार्यों के बिलों के भुगतान को पास कराने के एवज में निजी कंपनियों से मोटी रकम वसूलने का खेल लंबे समय से चल रहा था। CBI को इसकी गुप्त सूचना मिली थी कि महेंद्रूघाट स्थित निर्माण भवन में अवैध लेन-देन होने वाला है। बुधवार से ही जाल बिछाकर सक्रिय हुई CBI की टीम ने घूस की रकम के साथ आरोपियों को दबोच लिया।

7 दिनों की रिमांड पर आरोपी, खुलेंगे कई राज
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों को पटना की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें सात दिनों की रिमांड पर भेज दिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच की कमान पटना CBI की डीएसपी रूबी चौधरी को सौंपी गई है। रिमांड के दौरान CBI रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और निजी कंपनी के पदाधिकारियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। सूत्रों का मानना है कि इस पूछताछ में रेलवे के कई अन्य बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं जो इस ‘कमीशन खेल’ का हिस्सा थे।

यह कार्रवाई बिहार में रेलवे परियोजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है और भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है।

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