विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त (Plastic Free) घोषित कर दिया गया है। बोधगया मंदिर प्रबंधकारिणी समिति (BTMC) ने मंदिर परिसर के भीतर प्लास्टिक और पॉलिथीन के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
मुख्य बदलाव और नियम;
प्रवेश पर रोक: मंदिर में प्रवेश द्वार पर ही स्पष्ट नोटिस लगा दिया गया है। अब श्रद्धालु अपने साथ प्लास्टिक बैग या पॉलिथीन अंदर नहीं ले जा सकेंगे।
पूजा सामग्री में बदलाव: तिब्बती परंपरा के अनुसार जल अर्पित करने के लिए पहले प्लास्टिक की कटोरियों का उपयोग होता था, जिसे अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब श्रद्धालु केवल स्टील या कागज के बर्तनों का ही उपयोग कर सकेंगे।
विकल्प के रूप में जूट और कपड़ा: बीटीएमसी ने अपील की है कि लोग प्लास्टिक के स्थान पर जूट या कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करें।
बीटीएमसी की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी ने बुधवार (21 जनवरी, 2026) को बताया कि यह पहल न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी बढ़ावा देगी। “कपड़े और जूट के थैलों की मांग बढ़ने से स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिलेगा। वे इसे बनाकर अपनी आजीविका चला सकेंगी। यह केवल मंदिर का नियम नहीं, बल्कि समय की मांग है।” – डॉ. महाश्वेता महारथी
आयोजकों को सख्त निर्देश;
बोधगया में वर्तमान में पर्यटन सीजन चल रहा है, जहाँ विभिन्न देशों के श्रद्धालु विश्व शांति के लिए वार्षिक पूजा और विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। बीटीएमसी ने सभी आयोजन समितियों, बौद्ध भिक्षुओं और लामाओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी धार्मिक आयोजन में प्लास्टिक का प्रयोग न किया जाए।
पर्यटकों के लिए सलाह;
यदि आप इन दिनों बोधगया दर्शन का मन बना रहे हैं, तो अपने साथ प्लास्टिक की वस्तुएं ले जाने से बचें। परिसर को स्वच्छ और हरा-भरा रखने के लिए सामूहिक सहयोग की अपील की गई है।