रिश्वतकांड में बिहार के पूर्व SDM को बड़ा झटका: 100% पेंशन कटौती का फैसला बरकरार, सरकार ने रिव्यू पिटीशन की रद्द…

Ritu Raj

बिहार सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के प्रति अपनाई गई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक बड़ी कार्रवाई की गई है। जयनगर के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) गुलाम मुस्तफा अंसारी के विरुद्ध रिश्वतखोरी का आरोप सिद्ध होने के बाद, सरकार ने उनकी शत-प्रतिशत (100%) पेंशन पर स्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया है।

मामला और गिरफ्तारी (2016);
यह प्रकरण वर्ष 2016 का है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक शिकायत के आधार पर जाल बिछाया था। आरोप था कि तत्कालीन एसडीएम ने रामवृक्ष साह नामक व्यक्ति से ₹1,00,000 की रिश्वत मांगी थी। छापेमारी के दौरान अधिकारी के सरकारी आवास पर उनके अर्दली के पास से चिह्नित नोट (GC Notes) बरामद किए गए, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

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विभागीय जांच के मुख्य बिंदु;
बिहार सरकारी सेवक नियमावली के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही में अधिकारी पर लगे सभी आरोप पूर्णतः प्रमाणित पाए गए। गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भ्रष्ट आचरण की पुष्टि की। आरोपित अधिकारी अपनी बेगुनाही का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।

कठोर दंडात्मक कार्रवाई;
बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43 (बी) के तहत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारी की पूरी पेंशन स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया। अधिकारी ने बचाव में दलील दी थी कि मामला कोर्ट में लंबित है, किंतु विभाग ने स्पष्ट किया कि “विभागीय कार्यवाही” और “आपराधिक मामला” दो अलग प्रक्रियाएं हैं, और प्रशासनिक स्तर पर साक्ष्यों के आधार पर सजा देना पूर्णतः उचित है।

पुनर्विलोकन याचिका (Review Petition) खारिज;
श्री अंसारी द्वारा सजा के विरुद्ध दायर पुनर्विचार याचिका को अनुशासनिक प्राधिकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने उनकी दलीलों को ‘भ्रामक’ करार देते हुए 6 अप्रैल 2026 को संकल्प जारी किया कि पुरानी शास्ति (पेंशन कटौती) बरकरार रहेगी।

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