नौलखा मंदिर लूटकांड: श्रद्धा को किया शर्मसार, मुख्य पुजारी का बेटा और भतीजा निकले लूट के साजिशकर्ता

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
नालंदा जिले के राजगीर स्थित प्रसिद्ध नौलखा मंदिर में हुई संगठित लूटकांड का पुलिस ने तेज़ी से खुलासा करते हुए चौंकाने वाले तथ्य सामने लाए हैं। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहे इस मंदिर को लूटने की साजिश मंदिर के ही मुख्य पुजारी सिद्धेश्वर तिवारी के बेटे विनीत कुमार और भतीजे परमीत तिवारी ने अपने साथियों के साथ मिलकर रची थी।

पुलिस ने इन दोनों सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से ₹8.05 लाख नकद, देसी पिस्तौल, जिंदा कारतूस, मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त अन्य सामान बरामद किया है। रविवार देर रात करीब 2:00 से 2:30 बजे के बीच यह वारदात अंजाम दी गई। लुटेरे मंदिर में दाखिल हुए और वहां तैनात नाइट गार्ड पर जानलेवा हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।

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घटना के बाद पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, एफएसएल टीम, डॉग स्क्वॉड और अन्य एजेंसियों की मदद से जांच को अंजाम तक पहुंचाया। इस तेज़ और समन्वित कार्रवाई के परिणामस्वरूप पुलिस ने 24 घंटे के भीतर ही मामले को सुलझा लिया, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

नालंदा एसपी भारत सोनी ने प्रेस वार्ता में बताया कि, “सभी आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि लूट का पूरा प्लान आर्थिक लाभ के लिए रचा गया था। सबसे दुखद पहलू यह है कि इसमें मंदिर परिवार के ही लोग शामिल थे।”

उन्होंने यह भी बताया कि मामले में स्पीडी ट्रायल के तहत कार्यवाही की जाएगी ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके। घायल नाइट गार्ड को पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने इस लूटकांड के दौरान आरोपियों के पास से ₹8,05,000 नकद, एक देसी पिस्तौल, दो जिंदा कारतूस, एक मोटरसाइकिल, तीन मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त अन्य वस्तुएं बरामद की हैं।

यह लूटकांड न केवल एक आपराधिक घटना है, बल्कि यह आस्था, विश्वास और मंदिर व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। जहां श्रद्धालु भगवान के चरणों में समर्पण भाव से दान करते हैं, वहीं मंदिर के अंदर से ही लोभ और लालच जन्म ले रहा है। इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि पुलिस यदि इच्छाशक्ति से कार्य करे तो अपराधी कितना भी भीतर के हों, उन्हें बेनकाब किया जा सकता है। राजगीर का नौलखा मंदिर जहां श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक था, वहीं अब एक अपराध कथा का भी गवाह बन गया है। मुख्य पुजारी के परिवार के लोग ही जब आस्था को लूटने पर उतारू हो जाएं, तो सवाल सिर्फ मंदिर प्रशासन पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों पर भी उठते हैं।

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