बिहार में पुलिस की बर्बरता, आधी रात को घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों को पीटा

नाला निर्माण विवाद में पुलिस ने निर्दोष ग्रामीणों पर की बर्बर कार्रवाई, डीजीपी ने दिए जांच के आदेश

Rahul
By Rahul
  • सिंघाड़ी गांव में पुलिस का खौफनाक हमला, बुजुर्गों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा

सिटी पोस्ट लाइव

औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले के गोह थाना क्षेत्र के सिंघाड़ी गांव में पुलिस के बर्बर व्यवहार का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने आधी रात को गांव में घुसकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को निर्दयता से पीटा। यह घटना मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत एक नाले के निर्माण को लेकर दो पक्षों के बीच हुए विवाद के बाद घटित हुई। इस विवाद के दौरान पुलिस ने एक पक्ष के लोगों पर हिंसा की, जिसके बाद मामला और बढ़ गया।

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सूत्रों के अनुसार, पुलिस का यह हमला रात करीब 2 बजे गोह थाना प्रभारी सुदीश कुमार के नेतृत्व में हुआ। पुलिस ने भूमिहार जाति के हर घर में घुसकर न केवल पुरुषों, बल्कि महिलाओं और बच्चों को भी बुरी तरह से पीटा। इस हमले में कई लोग घायल हो गए, जिनमें महिलाएं, किशोर और किशोरियां शामिल हैं। पुलिस की बर्बरता का शिकार हुई एक महिला रंजना देवी ने बताया कि उनकी 18 वर्षीय बेटी अदिती कुमारी को भी इस दौरान चोटें आईं। अन्य घायलों में संतोष शर्मा की पत्नी रीना देवी, विमलेश शर्मा की बेटी नीतू कुमारी, 15 वर्षीय रितिक रोशन और 12 वर्षीय कृष्णनंदन कुमार शामिल हैं। घायलों का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में किया गया और गंभीर मामलों में उन्हें मगध मेडिकल कॉलेज, गया भेजा गया।

इस घटना में सबसे अधिक दुखद पहलू यह है कि पुलिस ने 100 वर्षीय बुजुर्ग महिला बुचानी देवी को भी नहीं बख्शा। बुचानी देवी ने बताया कि पुलिस ने आधी रात में उनके घर का दरवाजा खटखटाया और खिड़की तोड़ने का प्रयास किया। जब उनकी बहू ने दरवाजा खोला तो पुलिस ने गालियां दीं और घर का सारा सामान इधर-उधर फेंक दिया।

यह घटना सिंघाड़ी गांव में नाले के निर्माण के कारण दो पक्षों के बीच हुई झड़प के बाद हुई। गांव के लोग आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए एक पक्ष को निशाना बनाया और दूसरी ओर से विवाद को और बढ़ा दिया। एक दिन पहले पुलिस ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाया था, लेकिन रात के समय इस बर्बरता को अंजाम दिया गया।

गोह थाना प्रभारी सुदीश कुमार ने इस घटना के संबंध में कहा कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए गांव पहुंची थी और इसके दौरान कोई मारपीट नहीं हुई। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने पूरी योजना बनाकर भूमिहार जाति के घरों में घुसकर बर्बर तरीके से मारपीट की। जनप्रतिनिधियों ने इसकी कड़ी निंदा की है और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सिंघाड़ी गांव में हुई इस घटना ने बिहार पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। पुलिस के इस व्यवहार को लेकर राज्य के कई नेताओं ने भी नाराजगी व्यक्त की है। अब डीजीपी विनय कुमार ने इस मामले की जांच का आदेश दिया है, और यह देखा जाएगा कि इस बर्बरता के खिलाफ पुलिस पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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