बेगूसराय में कानून का राज या अपराधियों का आतंक?

Deepak Sharma

बेगूसराय में कानून की गिरती साख अपराधियों के आगे बेबस जनता और प्रशासन

सिटी पोस्ट लाइव

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जिला बेगूसराय इन दिनों अपराध की चपेट में है। लूट, हत्या और अपहरण की बढ़ती घटनाओं से आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। स्थिति यह हो गई है कि अब लोग सुरक्षा की मांग को लेकर सड़कों पर उतर कर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए हैं। साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र में बीते दस दिनों में आपराधिक घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है। 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या, एनडीए नेता की हत्या, और हम पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष के अपहरण जैसी गंभीर घटनाओं ने इलाके में दहशत फैला दी है। इससे आक्रोशित होकर बुधवार को स्थानीय लोगों ने हड़ताली चौक पर धरना-प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब अपराधियों में पुलिस का कोई डर नहीं बचा है। अपराधी सरेआम घटना को अंजाम दे रहे हैं, जबकि पुलिस छुटपुट गिरफ्तारी को अपनी उपलब्धि बताकर खानापूर्ति में लगी है। कई लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि शिकायत करने पर एसपी आम आदमी को ही दोषी ठहरा देते हैं, जिससे जनता की नाराजगी और बढ़ गई है। बेगूसराय के हालात अब इतने भयावह हो चुके हैं कि लोग अंधेरा होते ही घरों में कैद हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि अब कोई नहीं जानता कि अगला निशाना कौन होगा। इलाके में ऐसी भयावह स्थिति लंबे समय बाद देखने को मिल रही है। भाजपा नेता और वकील अमरेंद्र कुमार अमर ने कहा, “अपराधी अब घोड़े पर चढ़कर अपहरण कर रहे हैं, पुलिस मूकदर्शक बनी है। कानून का राज अब केवल किताबों तक सीमित रह गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस के इकबाल का पूरी तरह से क्षय हो चुका है, और अपराधी खुलकर चुनौती दे रहे हैं।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साहेबपुर कमाल के थाना प्रभारी को हटाने की मांग की है। साथ ही बेगूसराय के एसपी से भी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि पुलिस न केवल सुस्त है, बल्कि आम जनता की चिंता को समझने में असमर्थ है।

बेगूसराय की वर्तमान स्थिति चिंता का विषय है। अपराध का ग्राफ जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उससे न केवल आम जनता का विश्वास डगमगाया है, बल्कि पुलिस प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि प्रशासन ने जल्द सख्त कार्रवाई नहीं की, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। जनता अब बदलाव की मांग को लेकर सड़कों पर है, आवाज़ बुलंद हो चुकी है। “जब कानून का डर खत्म हो जाए, तो जनता का गुस्सा सड़कों पर उतरना तय है।”

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