सुप्रीम कोर्ट की “जंगलराज” से भी बड़ी टिप्पणी; कहा- बिहार की राजनीति में अपराध का बोलबाला

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव

पटना/नई दिल्ली। बिहार की राजनीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बड़ी और सख्त टिप्पणी की है, जिसे कई जानकार 1997 में पटना हाई कोर्ट द्वारा दिए गए “जंगलराज” वाले बयान से भी गंभीर मान रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार में अगर किसी व्यक्ति पर आपराधिक मामले दर्ज नहीं हैं, तो वह मुखिया भी नहीं बन सकता। यह बयान राज्य की राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण पर तीखा प्रहार माना जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिहार के एक मुखिया की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि बिहार में राजनीति का अपराधीकरण इस हद तक बढ़ चुका है कि जो अपराधी नहीं है, वह भी चुनावी दौड़ में टिक नहीं सकता। कोर्ट ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “अगर आपके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, तो आप बिहार में मुखिया बनने के लायक नहीं हैं।”

बिहार में अपराध और राजनीति का घालमेल

सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को राजनीति के चलते झूठे केस में फंसाया गया है, तो जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “बिहार में एक मुखिया के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिए, वरना वह चुनाव नहीं जीत सकता!” इसके बाद उन्होंने याचिकाकर्ता के खिलाफ मिले सबूतों का जिक्र करते हुए कहा कि “आपने किराए के गुंडे रखे, हेलमेट पहने एक आदमी बाइक पर था, दूसरा टोपी पहने हुए था… उनमें से एक ने मोबाइल गिरा दिया और अब आप फंस गए हैं क्योंकि आपके खिलाफ सबूत मिल चुके हैं।” कोर्ट ने इसे संगठित अपराध करार देते हुए कहा, “आप एक गुंडे की तरह काम कर रहे हैं।”

1997 के ‘जंगलराज’ बयान से भी बड़ी टिप्पणी!

1997 में पटना हाई कोर्ट के जस्टिस वीपी सिंह और जस्टिस धर्मपाल सिंह की पीठ ने बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर कहा था कि “यहां नाममात्र की सरकार है और जंगलराज कायम है।” उस समय यह टिप्पणी बिहार की राजनीति पर गहरा प्रभाव छोड़ गई थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी, जिसमें राजनीति में अपराधियों के बढ़ते दबदबे को उजागर किया गया है, उससे भी बड़ी मानी जा रही है।

बिहार की साख पर सवाल

पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. कौशलेंद्र नारायण ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कहा कि बिहार के लोग अब सोचें कि आखिर “सम्राट अशोक, गौतम बुद्ध और देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बिहार पर लगे इस कलंक को कैसे मिटाया जाए?” उन्होंने कहा कि सच में बिहार की राजनीति का पूरी तरह अपराधीकरण हो चुका है और जनता को इस पर विचार करना होगा कि बुद्ध के बिहार की गौरवशाली छवि को कैसे बहाल किया जाए।

कब खत्म होगा अपराध का वर्चस्व

इतिहास का जिक्र करते हुए अधिवक्ता ने जमुई जिले की एक हाजरा जनजाति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले इस जनजाति में किसी की शादी तब तक नहीं होती थी जब तक उस पर कोई एफआईआर दर्ज न हो। लेकिन समय बदला और अब शिक्षा के कारण यह परंपरा भी खत्म हो गई। सवाल उठता है कि जब यह जनजाति खुद को बदल सकती है, तो पूरा बिहार कब बदलेगा? बिहार की राजनीति में अपराध का वर्चस्व कब खत्म होगा और राज्य अपनी पुरानी गरिमा कैसे हासिल करेगा?

कटघरे में बिहार की राजनीति

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का बिहार की राजनीति और आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ता है। क्या इस टिप्पणी के बाद बिहार की राजनीतिक व्यवस्था में कोई सुधार होगा, या फिर यह भी बीते दिनों की एक और बड़ी टिप्पणी बनकर रह जाएगी?

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