सिटी पोस्ट लाइव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां के ख़िलाफ़ कथित टिप्पणी के विरोध में एनडीए महिला मोर्चा द्वारा बुलाए गए बिहार बंद के दौरान जहानाबाद में एक महिला शिक्षिका के साथ बदसलूकी का मामला सामने आया है। शिक्षिका को अपने स्कूल जाना था, लेकिन बंद समर्थकों ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों में जमकर बहस और धक्का-मुक्की हुई। इस घटना ने एक बार फिर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान आम नागरिकों के अधिकारों और महिला सम्मान पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कूल जाने को लेकर हुआ विवाद
यह घटना जहानाबाद के अरवल मोड़ के पास हुई, जहां भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता सड़क और दुकानों को बंद करवा रही थीं। इसी दौरान एक महिला शिक्षिका स्कूल जाने के लिए निकलीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब शिक्षिका ने बंद का विरोध किया और अपनी राह आगे बढ़ानी चाही, तो बंद समर्थक महिलाओं ने उन्हें रोका। विवाद तब बढ़ गया जब शिक्षिका ने कथित तौर पर इस घटना की तस्वीरें और वीडियो लेना शुरू कर दिया। इससे गुस्साए बंद समर्थकों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और शिक्षिका को भीड़ से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
शिक्षिका का पक्ष और कार्यकर्ताओं के आरोप
शिक्षिका ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह एक शिक्षक हैं और किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनका कर्तव्य समय पर स्कूल पहुंचकर अपने छात्रों को पढ़ाना है। दूसरी ओर, महिला कार्यकर्ताओं ने उन पर राजद (RJD) के लिए काम करने का आरोप लगाया। इस घटना के बाद कई लोगों ने सवाल उठाया है कि एक ‘मां के सम्मान’ के लिए बुलाए गए बंद में दूसरी ‘मां’ का अपमान क्यों किया गया।
राज्य में एनडीए की सरकार होने के बावजूद स्कूल-कॉलेज और अन्य सरकारी संस्थानों को बंद नहीं करने के फ़ैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर सरकार चाहती तो बंद को सफल बनाने के लिए सरकारी संस्थानों में छुट्टी की घोषणा कर सकती थी, ताकि आम जनता को असुविधा न हो।
कांग्रेस की यात्रा से मिली नई ताक़त
इधर, राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के बाद बिहार की राजनीति में कांग्रेस की छवि में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब तक महागठबंधन में “कमजोर कड़ी” मानी जाने वाली कांग्रेस को इस यात्रा से नई मजबूती मिली है। बिहार के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा है और पार्टी को ज़मीनी स्तर पर जनता से जोड़ने का काम किया है।
इस घटना के बाद बिहार में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है। जहां एनडीए इस बंद को प्रधानमंत्री के सम्मान से जोड़ रही है, वहीं विपक्षी दल इस तरह के विरोध प्रदर्शनों में आम लोगों को निशाना बनाने पर सवाल उठा रहे हैं।