पटना में होटल पनाश में धमकी भरा ईमेल, 2 किलो TNT विस्फोटक का दावा!

Manisha Kumari

सिटी पोस्ट लाइव

पटना: गांधी मैदान स्थित होटल पनाश को एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ है, जिसमें लिखा गया है कि होटल के अंदर विस्फोटक रखा गया है। यह ईमेल याकूब मेनन के नाम से भेजा गया था, जिसमें होटल के सभी स्टाफ और मेहमानों को अंदर से बाहर निकालने की धमकी दी गई थी। ईमेल मिलते ही, होटल प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और गहन छानबीन की।

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होटल के मैनेजर के आवेदन पर गांधी मैदान थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब साइबर सेल के सहयोग से इस ईमेल की गंभीरता से जांच कर रही है। इस घटना से होटल के कर्मचारियों और मेहमानों में डर और घबराहट का माहौल है, और उन्होंने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। वहीं, स्थानीय लोग और व्यापारी अब सुरक्षा इंतजामों में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले का हल निकाला जाएगा और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

बता दें कि ईमेल में विस्फोटक के बारे में जानकारी दी गई थी और लिखा था कि होटल के सभी मेहमानों और कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए कहा गया था। इसके बाद, सीबीआई विशेष अदालत को भी सूचित करने की बात की गई थी। TNT (ट्राइनाइट्रो टोल्यून) एक शक्तिशाली विस्फोटक है, जिसका इस्तेमाल उद्योगों और खनन कार्यों में किया जाता है। इस धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

होटल के VP ने ईमेल को देखकर गहरी चिंता जताई और कहा कि इस प्रकार की जानकारी से हड़कंप मच सकता है, और जोखिम भी बढ़ सकता है। होटल की सुरक्षा और अतिथियों की सुरक्षा को लेकर होटल प्रशासन भी चिंतित था। ईमेल में एक आतंकी संगठन के स्लीपर सेल का भी जिक्र था, जिससे पुलिस की चिंता और बढ़ गई। स्लीपर सेल सामान्य जीवन जीने वाले गुप्त समूह होते हैं जो आतंकी गतिविधियों में लिप्त हो सकते हैं।

पुलिस ने कहा कि इस ईमेल के बाद मामला जालसाजी, भ्रामक जानकारी और IT एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। गांधी मैदान थाना के थानेदार सीताराम प्रसाद ने कहा कि पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। साथ ही, आसपास के इलाकों में भी चौकसी बढ़ाई गई है। शानदार सुरक्षा इंतजामों के बावजूद, अभी तक होटल से किसी भी विस्फोटक का पता नहीं चला है। पुलिस ने कहा कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा। हालांकि, एक बड़ा सवाल यह भी है कि ईमेल में याकूब मेनन का नाम क्यों लिया गया, जबकि 2015 में उन्हें फांसी दे दी गई थी। पुलिस इस संदिग्ध मामले की गहरी जांच कर रही है।

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