शहीद करमजीत सिंह बक्शी का बलिदान हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है : संजय सेठ

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव
हजारीबाग :
हजारीबाग शहर के गुरु गोविंद सिंह रोड स्थित गुरुद्वारा सभागार में शहीद करमजीत सिंह बक्शी की अंतिम अरदास का आयोजन किया गया, जिसमें रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और सदर विधायक प्रदीप प्रसाद प्रमुख रूप से शामिल हुए। इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सिख समुदाय के लोग और शहीद के परिजन के साथ कई लोग उपस्थित थे। शहीद करमजीत सिंह बक्शी की वीरता और उनके बलिदान को सम्मानित करने के लिए यह आयोजन किया गया।

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने शहीद के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने कहा की शहीद करमजीत सिंह बक्शी का बलिदान न केवल हमारे राज्य बल्कि हमारे देश के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी वीरता का कोई मोल नहीं हो सकता, और उनका शौर्य हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। मैं इस दुख की घड़ी में शहीद के परिवार के साथ हूं और उनकी मदद के लिए हमेशा तत्पर हूं। सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने सिख समुदाय के आग्रह पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की।

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उन्होंने कहा की शहीद करमजीत सिंह बक्शी के योगदान को याद रखने और उनका सम्मान करने के लिए हमने एक बड़ा कदम उठाया है। शहीद के निवास स्थान, जो कि जुलु पार्क हॉली क्रॉस रोड पर स्थित है, उसको अब शहीद करमजीत सिंह मार्ग’ के नाम से जाना जाएगा। यह बदलाव जल्द ही एक से दो दिनों के अंदर किया जाएगा और बोर्ड वहां लगाया जाएगा। साथ ही, विधायक ने यह भी घोषणा की कि हजारीबाग के प्रमुख स्थल, पैगोडा चौक का नाम अब शहीद करमजीत सिंह चौक’ रखा जाएगा।

इस नामकरण के लिए उन्होंने संबंधित मंत्री और सचिव से वार्ता की है और उन्होंने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही यहां पर भी नया बोर्ड लगाया जाएगा। प्रदीप प्रसाद ने आगे कहा की हमारे लिए यह गर्व की बात है कि हम शहीद करमजीत सिंह जैसे वीर व्यक्तित्व को सम्मान दे पा रहे हैं। उनका योगदान हमेशा हमारे दिलों में रहेगा।

यह निर्णय उनके प्रति हमारी श्रद्धा और सम्मान को दशार्ता है। कार्यक्रम के अंत में रक्षा राज्य मंत्री और सदर विधायक ने शहीद करमजीत सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके परिवारजनों से मिलकर दुख की इस घड़ी में उन्हें साक्षी बने। इस आयोजन से यह संदेश गया कि शहीदों के सम्मान में कोई भी प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। राज्य और स्थानीय नेताओं ने अपने दृढ़ संकल्प और समर्पण से यह सुनिश्चित किया कि शहीदों के योगदान को हमेशा याद रखा जाए और आने वाली पीढ़ी उनके बलिदान से प्रेरणा प्राप्त करे।

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