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दिवाली खत्म होते ही उत्तर बिहार में छठ महापर्व शुरू हो जाता है। आइए जानते है नहाय-खाय से लेकर सूर्य अर्घ्य तक का सही समय और शुभ मुहूर्त क्या है।
उत्तर भारत में दिवाली समाप्त होते ही बिहार का सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा की रौनक देखने लगती है। यह पर्व बिहार, झारखंड और यूपी के अलावा नेपाल के भी कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देव और प्रकृति के लिए खास माना जाता है। 4 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु नदियों और तालाबों के घाट पर जुटते हैं। और यहां सूर्य तथा छठी मैया को अर्घ्य अर्पित करते हैं। बता दें,इस साल छठ पूजा 25 अक्टूबर से शुरू होकर 28 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया के प्रति आभार प्रकट करने के साथ-साथ परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की मंगल कामना के लिए की जाती है।

कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से छठ महापर्व की शुरुआत होती है। इस दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान के बाद सात्त्विक भोजन करते हैं। पारंपरिक आहार में दाल, भाप में पका चावल और लौकी की सब्जी विशेष रूप से शामिल रहती है। माना जाता है कि यह निर्मल भोजन तन और मन दोनों की पवित्रता का प्रतीक है तथा साधक को शारीरिक व मानसिक शुद्धि प्रदान करता है। उसके बाद खरना के दिन श्रद्धालु पूरे दिन निर्जल उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद में खीर, रोटी, पूड़ी और घी का विशेष महत्व माना जाता है। सूर्यास्त के उपरांत इन्हीं प्रसादों से व्रत की विधिवत शुरुआत होती है। औऱ फिर अगले दो दिनों तक भक्त कठोर निर्जला उपवास रखते हैं, जो अंतिम अर्घ्य अर्पित करने तक जारी रहता है।

संध्या अर्घ्य पर व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। घाटों पर दीपों की रोशनी और टोकरियों में सजाए फल, गन्ना, नारियल व ठेकुआ से वातावरण दिव्य हो उठता है। सूर्यास्त अर्घ्य का समय शाम 5:40 बजे निर्धारित है। इसके अलावा छठ महापर्व के अंतिम दिन व्रती प्रातःकाल उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसी के साथ कठोर व्रत का विधिवत समापन होता है। इस बार उषा अर्घ्य का शुभ समय सुबह 6:30 बजे निर्धारित है।