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प्रयागराज: प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। शनिवार और रविवार को शहर में भारी जाम के चलते यह निर्णय लिया गया है। अब महाकुंभ के पूरे आयोजन के दौरान वाहन मेला क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। श्रद्धालुओं को शहर और मेला क्षेत्र के बाहर निर्धारित पार्किंग स्थलों पर अपने वाहन पार्क करने होंगे और फिर मेला क्षेत्र में प्रवेश करना होगा।
प्रयागराज में महाकुंभ में एंट्री के लिए मुख्य रूप से 7 रास्ते तय किए गए हैं। यहां बस और निजी वाहनों से आने वाले श्रद्धालु इन रास्तों से पार्किंग तक पहुंचेंगे। संगम से लगभग 10-12 किलोमीटर पहले ही वाहन पार्क कर दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए शटल बस की व्यवस्था की गई है। हालांकि, यात्रियों ने आरोप लगाया है कि शटल बसें या तो मिल नहीं रही हैं या फिर मेला क्षेत्र से काफी पहले सवारी को उतार दिया जा रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं को 10 से 12 किमी तक पैदल चलने की स्थिति आ सकती है।
पुलिस अधिकारी लगातार अनाउंसमेंट कर वाहन चालकों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील कर रहे हैं और व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए कमान संभाले हुए हैं। प्रयागराज जंक्शन और अन्य 8 स्टेशनों पर आने-जाने के रास्ते अलग-अलग बनाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर एक से प्रवेश हो रहा है, जबकि सिविल लाइंस से प्लेटफॉर्म से बाहर निकलने का रास्ता है। यहां से संगम की दूरी लगभग 12 किमी है। शटल बसों की कमी के कारण श्रद्धालुओं को पैदल ही इस दूरी को तय करना पड़ सकता है, क्योंकि मेला क्षेत्र में वाहन का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विभिन्न प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं। मेले में 10 लाख श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है, जिसमें फ्री और पेड दोनों प्रकार के ऑप्शन उपलब्ध हैं। अगर आप प्रीमियम व्यवस्था चाहते हैं तो संगम के किनारे लग्जरी डोम सिटी बनाई जा रही है, जिसमें किराया 80,000 रुपए से लेकर 1.25 लाख रुपए प्रतिदिन तक हो सकता है।
इसके अलावा, संगम के आसपास लगभग 2000 टेंट सिटी बनाई गई हैं, जहां रुकने के लिए 3,000 से लेकर 30,000 रुपए तक खर्च करने होंगे। इनकी बुकिंग पहले से करानी होगी। शहर में 42 लग्जरी होटल हैं, जिनकी अपनी वेबसाइट्स हैं, जहां से आप बुकिंग कर सकते हैं। साथ ही, मेला क्षेत्र में 100 आश्रयस्थल भी तैयार किए गए हैं, जहां हर आश्रयस्थल में 250 बेड उपलब्ध हैं। 10,000 से अधिक स्वयंसेवी संस्थाएं भी श्रद्धालुओं के लिए सुविधा प्रदान कर रही हैं।