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प्रयागराज: महाकुंभ 2025 का आयोजन आज से शुरू हो गया है, जिसमें पहला शाही स्नान 14 जनवरी को होगा। शाही स्नान का विशेष महत्व होता है और इसे करने से व्यक्ति को अमोघ पुण्य मिलता है। महाकुंभ मेला भारत का सबसे प्रसिद्ध और आस्था का प्रतीक मेला है, जो हर 144 वर्षों में एक बार लगता है। इस बार यह मेला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित हो रहा है, जहां त्रिवेणी संगम स्थल पर भक्तगण स्नान करते हैं। यह मेला ग्रहों के अद्भुत संयोग पर आधारित होता है, जो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तय किया जाता है। खासकर जब देवगुरु बृहस्पति वृष राशि में, शनि कुंभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तब महाकुंभ का आयोजन होता है।
महाकुंभ मेला 2025 आज 13 जनवरी को शुरू हो चुका है और इसका समापन 26 फरवरी 2025, महाशिवरात्रि के दिन होगा। इस बार महाकुंभ का आयोजन एक विशेष शुभ संयोग में हो रहा है, जो समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत की कुछ बूंदें इस स्थान पर गिरी थीं, और यहां स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाकुंभ के दिन ग्रहों की स्थिति विशेष रूप से शुभ होती है। इस दिन सूर्य, चंद्रमा, देवगुरु बृहस्पति और शनि सभी अच्छे ग्रहों की स्थिति में होते हैं। यह वही स्थिति है जो समुद्र मंथन के समय थी।
इस दिन पौष पूर्णिमा का व्रत भी है, और इस दिन स्नान, दान और ब्राह्मणों को भोजन कराने का विशेष महत्व है। सुबह से रवि योग है, जो जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला होता है। साथ ही भद्रासंशय भी है, जो आम जीवन में लाभकारी साबित होगा। महाकुंभ के इस विशेष दिन पर मेष, वृष, सिंह और मकर राशि के जातकों के लिए भाग्य के दरवाजे खुलेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन राशियों के जातकों का समय बदलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे, नए प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलेगी, और नौकरी में उन्नति भी होगी। महाकुंभ मेला न केवल आस्था और पुण्य की प्राप्ति का अवसर है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन भी है, जो पूरे देश में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।