नीतीश का ‘मिशन दिल्ली’: कुंडली में उपराष्ट्रपति बनने के प्रबल संयोग, 2029 में चमकेगी किस्मत!..

Ritu Raj

बिहार की राजनीति के केंद्र रहे नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, उनकी कुंडली में बन रहे विशेष योग उन्हें एक नई और उच्च भूमिका की ओर ले जा रहे हैं। गौरतलब है कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, नीतीश कुमार का बिहार से दिल्ली जाना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि उनकी कुंडली में बैठे सूर्य, राहु और शुक्र का सुनियोजित परिणाम है। 2029 तक का समय उनके लिए प्रतिष्ठा के शिखर पर पहुँचने का मार्ग तैयार कर रहा है।

वर्तमान ग्रह दशा और स्थान परिवर्तन;
नीतीश कुमार की कुंडली में इस समय राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा और बुध की प्रत्यन्तर दशा चल रही है। ज्योतिष शास्त्र में इन तीनों का संयोग अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
1) राहु: पद और प्रतिष्ठा में अचानक वृद्धि कराता है।
2) शुक्र: वैभव, ऐश्वर्य और प्रसिद्धि का कारक है।
3) बुध: कुशाग्र बुद्धि और कुशल नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है।

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भविष्य की मुख्य भविष्यवाणियाँ (2027 – 2029);

समय अवधिज्योतिषीय अनुमानसंभावित प्रभाव
वर्तमान (2024-25)पद-प्रतिष्ठा में वृद्धिराज्यसभा गमन और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता।
अप्रैल 2027चंद्रमा की अंतर्दशास्वास्थ्य संबंधी चिंताएं (माइग्रेन, सांस की समस्या) संभव।
2027 – 2028उतार-चढ़ाव का दौरराजनीतिक जीवन में कुछ चुनौतियां और अस्थिरता।
नवंबर 2029गुरु की महादशाकरियर में बड़ा मोड़, किसी अति-उच्च पद (जैसे उपराष्ट्रपति) के योग।

मंगल और शनि का प्रभाव;
पंडित राकेश झा के अनुसार, नीतीश कुमार की राशि वृश्चिक है, जिसका स्वामी मंगल है। मंगल उन्हें अपने कार्यों के प्रति उत्साही और लक्ष्य-केंद्रित बनाता है। वह स्वभाव से हठी हैं और अयोग्यता या काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं करते। हालांकि, कुंडली में शनि की उपस्थिति उन्हें करियर और जीवन में कठिन समय में भी स्थिरता प्रदान करती है। नीतीश कुमार के लिए मार्च का महीना ‘लकी’ रहा है। उनका जन्म, पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ और अब राज्यसभा का नामांकन, सभी मार्च में ही संपन्न हुए हैं। सूर्य और बुध की युति उन्हें एक मंझा हुआ राजनेता और रणनीतिकार बनाती है।

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