मां दुर्गा की विदाई से पहले सिंदूर खेला क्यों जरूरी है, जानिए इस रस्म का महत्व…

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव

मां दुर्गा को विदाई से पहले पारंपरिक सिदूंर खेला होता है। इसे बंगाली समुदाय बहुत ही धूमधाम से खेलते हैं। आइए जानते हैं इसका खास महत्व।

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हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा का खास महत्व होता है। इस दौरान 9 देवियों की पूजा- अर्चना की जाती है। वहीं, त्योहार का समापन विजय-दशमी के दिन होता है। इसी दिन, बंगाल में अनोखी परंपरा निभाई जाती है,जिसे सिंदूर खेला कहा जाता है। दरअसल, इस दिन विवाहित महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं। उसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। बता दें, इस साल यह रस्म 2 अक्टूबर, गुरुवार यानी विजयदशमी के दिन ही आयोजित की जाएगी।

गौरतलब है कि सिंदूर खेला का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। इस परंपरा को निभाने से महिलाओं के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और वैवाहिक सुख बना रहता है। यह रस्म अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मांगने का माध्यम है। सिंदूर खेला की परंपरा अब सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे भारत और विदेशों में, जहां भी बंगाली समुदाय निवास करता है, वहां इसे बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाता है।

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