दिल्ली AI समिट में जुटे दुनिया के दिग्गज, पर क्या आप जानते हैं 70 साल पहले किसने और क्यों रखा था ‘AI’ नाम?…

Ritu Raj

हाल ही में संपन्न हुए इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल भविष्य की कल्पना नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई है। सैम ऑल्टमैन और डेमिस हसाबिस जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने इस तकनीक की गंभीरता को रेखांकित किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ शब्द पर आज पूरी दुनिया चर्चा कर रही है, उसका जन्म कब और कैसे हुआ था?

1956: वह साल जब AI को पहचान मिली;
AI शब्द का इतिहास लगभग सात दशक पुराना है। इसकी औपचारिक शुरुआत 1956 में हुई थी। अमेरिका के डार्टमाउथ कॉलेज (Dartmouth College) में आयोजित एक ऐतिहासिक ग्रीष्मकालीन शोध सम्मेलन के दौरान यह शब्द पहली बार दुनिया के सामने आया।

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जॉन मैकार्थी: AI के जनक;
इस शब्द को गढ़ने का श्रेय अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक जॉन मैकार्थी (John McCarthy) को जाता है। दरअसल, मैकार्थी एक ऐसी मशीन की कल्पना कर रहे थे जो न केवल गणना करे, बल्कि इंसानों की तरह सोच भी सके। वहीं, उन्होंने ‘Artificial’ (कृत्रिम) और ‘Intelligence’ (बुद्धि) को इसलिए जोड़ा क्योंकि उनका मानना था कि मशीनों द्वारा की जाने वाली तर्कशक्ति और समस्या समाधान की प्रक्रिया मानवीय बुद्धिमत्ता का एक कृत्रिम प्रतिरूप है।

डार्टमाउथ सम्मेलन के अन्य महारथी;
सिर्फ मैकार्थी ही नहीं, बल्कि इस सम्मेलन ने उस दौर के सबसे तेज दिमागों को एक छत के नीचे इकट्ठा किया था। इसमें शामिल दिग्गजों ने AI की नींव रखी:
मार्विन मिन्स्की (Marvin Minsky): संज्ञानात्मक विज्ञान के विशेषज्ञ
क्लाउड शैनन (Claude Shannon): सूचना सिद्धांत के जनक
एलन नेवेल और हरबर्ट साइमन: जिन्होंने पहले AI प्रोग्राम की रचना में मदद की

एक साहसी सपना जो हकीकत बना;
1950 के दशक में, जब कंप्यूटर विशालकाय मशीनों की तरह थे, तब यह सोचना कि मशीनें शतरंज खेलेंगी या भाषा समझेंगी, एक ‘दुस्साहस’ माना जाता था। लेकिन शोधकर्ताओं का यह अटूट विश्वास ही था कि आज हम मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के युग में जी रहे हैं। आज AI मोबाइल ऐप्स से लेकर अदालतों के फैसलों और जटिल मेडिकल सर्जरी तक अपनी पैठ बना चुका है। 1956 में डार्टमाउथ के एक कमरे से शुरू हुआ यह सफर आज मानवता के सबसे शक्तिशाली औजार के रूप में हमारे सामने है।

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