जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग की तैयारी, 56 पूर्व जजों ने ‘धमकाने’ की कोशिश बताकर जताई चिंता

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसद तिरुचि शिवा ने मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा है। यह नोटिस 13 आरोपों के आधार पर जारी किया गया है, जिन पर पहले अगस्त महीने में आरोप लगाए गए थे। इस नोटिस पर 107 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। तिरुचि शिवा ने कहा कि वे लोकसभा अध्यक्ष के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अपने निर्णयों में निष्पक्षता और पारदर्शिता का उल्लंघन किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने कुछ विशेष समुदाय के वकीलों का पक्ष लिया और उनके निर्णय राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित हो सकते हैं, जो संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है। इन आरोपों में मंदिर और दरगाह से संबंधित मामलों पर उनके निर्णयों को लेकर विवाद भी है।

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स्वामीनाथन ने 1 दिसंबर को एक विवादास्पद आदेश दिया था, जिसमें उन्होंने अरुल्मिघु सुब्रमणिया स्वामी मंदिर को दीपाथूण में दीप जलाने का आदेश दिया था, जिसे मस्जिद के पास स्थित दरगाह के अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना गया। इस आदेश को लेकर विरोध बढ़ गया और विपक्षी दलों, विशेष रूप से डीएमके ने न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की।

इसके बावजूद, 56 पूर्व न्यायाधीशों ने इस महाभियोग प्रयास की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह न्यायपालिका को दबाने की एक सुनियोजित कोशिश है, जो लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के खिलाफ है। उनके मुताबिक, यदि यह प्रयास सफल होता है तो यह पूरे संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी साबित होगा।

पूर्व न्यायाधीशों ने एक बयान में कहा कि यह कदम न्यायपालिका को दबाने के लिए लिया जा रहा है और इससे भविष्य में न्यायपालिका को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। उनका मानना है कि महाभियोग का उद्देश्य केवल न्यायमूर्ति स्वामीनाथन को हटाना नहीं है, बल्कि इसे एक राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करना है, जो संविधान और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डालता है।

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