आबादी के अनुरूप आरक्षण देगी नीतीश सरकार?

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सिटी पोस्ट लाइव : जातीय जनगणना के आधार पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आरक्षण को लेकर बड़ा खेल कर सकते हैं. जनगणना  की रिपोर्ट जारी करने के बाद  उन्होंने  आज सर्वदलीय बुलायी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में होने वाली इस  बैठक में बेहद महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं.आज होने वाली ऑल पार्टी मीटिंग में जातीय गणना के आंकड़ों पर चर्चा होगी. इस बैठक में बिहार के जिन 9 दलों के नेता शामिल होंगे उनमें राजद, भाजपा, जदयू, कांग्रेस, भाकपा माले, CPI, CPM, AIMIM और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा का नाम है.

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माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ने यह इशारा कर दिया है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की ‘जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी’ की बात को मान सकते हैं. बिहार सरकार की नीतियों व आरक्षण में इसी आधार आरक्षण लागू करने का फैसला कर सकते हैं.सोमवार को जातिगत जनगणना रिपोर्ट जारी होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं इस बात के संकेत दिए थे मुख्यमंत्री ने कहा था कि हम सभी दलों के लोगों के सामने जातीय गणना से संबंधित आंकड़ों को प्रेजेंटेशन देंगे. इसके बाद जो करेंगे जो वह सब को पता चल जाएगा. यानी उनका साफ इशारा है कि सर्वदलीय बैठक बुलाकर सहमति के आधार पर जातिगत आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला किया जा सकता है.

 

सोमवार को बिहार सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने जातिगत गणना सर्वे रिपोर्ट साझा करते हुए बताया था कि प्रदेश में अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01 प्रतिशत है और सामान्य वर्ग की आबादी 15.52 प्रतिशत है. अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी) 27 प्रतिशत है. आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की आबादी में अनुसूचित जाति 19.65 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति 1.68 प्रतिशत है. प्रदेश की कुल 13 करोड़ से अधिक आबादी में हिंदू 81.99 प्रतिशत, मुस्लिम 17.7 प्रतिशत, ईसाई 0.05 प्रतिशत, सिख 0.01 प्रतिशत, बौद्ध 0.08 प्रतिशत और अन्य धर्मों के 0.12 प्रतिशत शामिल हैं.

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