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हरियाणा: ‘3 इडियट्स’ फिल्म के फरहान कुरैशी की तरह ही हरियाणा के झज्जर जिले के अभय सिंह, जिन्हें अब IITian बाबा के नाम से जाना जाता है, इन्हें भी फोटोग्राफी के प्रति गहरा रुझान था। हालांकि, परिवार के दबाव में उन्होंने अपनी पसंद को छोड़कर IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इस पूरे घटनाक्रम में वह भी फरहान की तरह खुद को असमंजस में महसूस करते थे।
अभय सिंह ने बताया कि उनका हमेशा से आर्ट में गहरी रुचि थी। “बचपन में, मैं लाइव स्केच बनाता था, लेकिन घर की परिस्थिति के चलते मुझे आर्ट में भविष्य नहीं दिखा। परिवार ने हमेशा कहा कि इस रास्ते से कोई फायदा नहीं होने वाला, इसलिए साइंस का रास्ता अपनाओ।” जब अभय ने 11वीं और 12वीं में आर्ट्स में जाने की बात की, तो परिवार ने कहा कि भविष्य में IAS की तैयारी कर लेना, लेकिन पहले साइंस को प्राथमिकता दी। उन्होंने 12वीं में मैथ्स लिया और फिर इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की।
अभय का मानना था कि इंजीनियरिंग में पैसे तो मिलेंगे, लेकिन वे एक ऐसा काम करना चाहते थे जो उन्हें सच्ची खुशी दे। “मैं एक ऐसी चीज करना चाहता था जो मुझे जीवनभर खुश रखे।” उन्होंने अपनी रुचि की दिशा बदली और डिजाइनिंग तथा विजुअल कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद ट्रैवल फोटोग्राफी में काम करने लगे और विभिन्न राज्यों में घूमे।
अभय सिंह ने कहा, “मैंने सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, केरल, हिमाचल और लाहौल स्पीति में घूमते हुए महसूस किया कि अब काफी हो चुका। जीवन में कुछ स्थिरता चाहिए।” अभय ने आगे बताया कि IIT में पढ़ाई करते हुए भी उनका असली सवाल यही था कि जीवन में वह कौन सा काम करें, जो उन्हें असली संतुष्टि दे। शुरुआत में वह स्टोरीटेलिंग और डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफी में रुचि रखते थे। उन्होंने बताया कि “मास्टर डिग्री के दौरान, मैंने घरेलू हिंसा के बच्चों पर प्रभाव को अपने विषय के रूप में चुना था।” धीरे-धीरे उनका रुझान अध्यात्म की ओर बढ़ा।
अभय सिंह के गुरु सोमेश्वर पुरी बताते हैं कि उन्हें अभय काशी में मिले थे, जहां वह साधू-संन्यासियों की तरह घूम रहे थे। उन्हें देखकर यह एहसास हुआ कि अभय में अध्यात्म के प्रति गहरी जिज्ञासा है, इसलिए उन्होंने उसे अपने साथ रखा और महाकुंभ में ले आए। वहां अभय सिंह ने महापुरुषों और गुरुओं से ज्ञान प्राप्त किया। अभय सिंह की यह यात्रा उनके जीवन के संघर्ष और परिवर्तन का प्रतीक बन गई है, और वह आज भी अपने अनूठे रास्ते पर चलने में यकीन रखते हैं, जिसमें उन्हें सच्ची खुशी मिल रही है।