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पटना: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जगलाल चौधरी की जयंती समारोह में हिस्सा लेते हुए भारतीय राजनीति में विचारधारा की लड़ाई पर जोर दिया। राहुल गांधी ने कहा, “एक तरफ आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा है, तो दूसरी तरफ अंबेडकर और जगलाल चौधरी जी की विचारधारा, जो महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित है।” राहुल गांधी ने दलितों के दर्द को आवाज देते हुए कहा, “जो दर्द और दुख दलितों के दिल में था, वह आवाज जगलाल चौधरी जी और आंबेडकर ने उठाई। वे हमें बताते थे कि हम जिस सिस्टम में रह रहे हैं, उसमें दलितों की कितनी भागीदारी है। क्या सच में उन्हें प्रतिनिधित्व मिल रहा है!”
उन्होंने आगे सवाल किया, “क्या हिंदुस्तान के सिस्टम में दलितों की कोई भागीदारी है! लोग कहते हैं कि दलितों को प्रतिनिधित्व मिला है, लेकिन बिना भागीदारी के इसका कोई मतलब नहीं है।” राहुल गांधी ने बीजेपी की आलोचना करते हुए कहा, “लोकसभा में एक एमपी निर्णय नहीं ले सकता, बीजेपी ही निर्णय करती है।” राहुल गांधी ने कहा, “बड़ी-बड़ी मीडिया कंपनियों के मालिकों में एक भी दलित का नाम नहीं मिलेगा। सीनियर एंकर और एडिटर की लिस्ट में भी दलितों का नाम नहीं मिलेगा। इतिहास में हमने दलितों के बारे में सिर्फ दो-तीन लाइनें पढ़ी हैं, क्या यह हमारी इतिहास का हिस्सा नहीं है?”
उन्होंने शिक्षा और आर्थिक असमानताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सीएम मोदी पर तंज करते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी ने 16 लाख करोड़ रुपये के लोन माफ किए, लेकिन इसमें एक भी दलित का नाम नहीं है। इनका जीएसटी माफी का कोई हिसाब नहीं है, जबकि भारत के गरीबों से जीएसटी वसूला जाता है।” राहुल गांधी ने जाति आधारित जनगणना की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “जाति जनगणना से आपको यह पता चलेगा कि दलित कौन हैं, पिछड़े कौन हैं और सामान्य वर्ग के कौन हैं।
तेलंगाना की जनगणना को देखिए, हम बिहार की जनगणना की बात नहीं कर रहें है। आज सभी अस्पतालों को निजी कर दिया गया है, लेकिन इसके मालिकों में कोई दलित नहीं है। इनको अस्पताल के लिए सरकारी ज़मीन अवंटित किया जा रहा है।” राहुल गांधी ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, “यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम दलितों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखें और इस सिस्टम को बदलें।”