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डुमरांव। कहते हैं कि सत्य की जीत होती है, और सोमवार को यह कहावत सच साबित हुई। न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने एक परिवार को 30 वर्षों बाद उनका हक दिलाया। पांच कट्ठे की इस जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा था, जिसे कोर्ट के निर्देश पर हटाया गया। कब्जा हटाने की इस प्रक्रिया में डुगडुगी पिटवाकर न्याय की घोषणा की गई, जिससे पीड़ित पक्ष को आखिरकार राहत मिली।

3 दशक पुराना था विवाद
यह मामला डुमरांव के महाराजा कोठी पथ का है। जानकारी के मुताबिक, कमल नगर मोहल्ले की निवासी स्वर्गीय विभा देवी और उनके पति स्वर्गीय राजीव रंजन लाल ने इस भूखंड को खरीदा था। उन्होंने यह जमीन व्यवसाय के लिए अमरेन्द्र नारायण पाठक को किराए पर दी थी। अमरेन्द्र और उनके परिवार ने कुछ समय बाद इस पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया और इसे खाली करने से इनकार कर दिया।
समय-समय पर इस विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। जब लगातार प्रयास असफल रहे, तो मामला डुमरांव अनुमंडल सिविल कोर्ट में पहुंचा। इस दौरान जमीन के असली मालिक, विभा देवी और राजीव रंजन लाल का निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटों, डॉ. सुमित सौरव और डॉ. सुमन सौरव ने न्याय के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखी।
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
कागजी दस्तावेजों की जांच के बाद, डुमरांव सिविल कोर्ट ने फैसला वादी के पक्ष में सुनाया और अमरेन्द्र नारायण पाठक को जमीन खाली करने का आदेश दिया। हालांकि, उन्होंने इस फैसले को बक्सर सिविल कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उनके दावे को खारिज कर दिया गया। इसके बावजूद अमरेन्द्र और उनके परिवार ने जमीन से कब्जा नहीं हटाया। पिछले हफ्ते कोर्ट और प्रशासन की टीम ने उन्हें 16 मार्च तक का समय दिया था, लेकिन जब निर्धारित समय में कब्जा नहीं हटाया गया, तो प्रशासन ने सख्त कदम उठाया।

कोर्ट के आदेश पर हटाया गया अवैध कब्जा
सोमवार को प्रशासनिक टीम, पुलिस बल और न्यायालय कर्मियों के साथ मौके पर पहुंची। डुगडुगी बजवाकर यह घोषणा की गई कि कोर्ट के आदेश के तहत अवैध कब्जा हटाया जा रहा है। इसके बाद, जेसीबी मशीन से अमरेन्द्र नारायण पाठक के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया और जमीन को असली मालिक, डॉ. सुमित सौरव और डॉ. सुमन सौरव को सौंप दिया गया।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान कोर्ट के नाजिर संतोष कुमार द्विवेदी, कोर्ट स्टाफ बाबूधन राय, राजस्व अधिकारी कुमार दिनेश (बतौर मजिस्ट्रेट), सीआई संजय यादव, बक्सर पुलिस लाइन के एसआई मो. मुर्तजा खां, स्थानीय थाना प्रभारी सुमन कुमार सहित पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, आरोपित पक्ष ने इस कार्रवाई का कोई विरोध नहीं किया।
असली मालिक को मिला न्याय
न्याय मिलने के बाद डॉ. सुमित सौरव ने कहा, “हमारे माता-पिता और हमें हमेशा कोर्ट पर भरोसा था। यह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि माता-पिता की अंतिम निशानी है, जिसे संभालकर रखना हमारा कर्तव्य है।” उन्होंने प्रशासन और कोर्ट का आभार जताया और कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए सबक है, जो दूसरों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाते हैं। तीस साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, आखिरकार न्याय की जीत हुई और असली मालिक को उनकी संपत्ति वापस मिल गई।