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पटना। पटना हाईकोर्ट ने 70वीं बीपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को दोबारा आयोजित कराने की मांग करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने इस संबंध में दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और राज्य सरकार को राहत मिली है। कोर्ट के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अब परीक्षा दोबारा आयोजित नहीं की जाएगी। यह फैसला उन उम्मीदवारों के लिए निराशाजनक है जो लंबे समय से परीक्षा में अनियमितताओं का हवाला देकर पुनर्परीक्षा की मांग कर रहे थे।
यह मामला पटना हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार की खंडपीठ में सुनवाई के लिए आया था। पप्पू कुमार व अन्य अभ्यर्थियों ने परीक्षा में गड़बड़ियों की शिकायत करते हुए जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने दलील दी थी कि परीक्षा में कई अनियमितताएं हुई हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा था और अब सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
अभ्यर्थियों और शिक्षकों का आंदोलन, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
हाईकोर्ट के इस फैसले से बीपीएससी अभ्यर्थियों और शिक्षकों में जबरदस्त आक्रोश है। कई महीनों से अभ्यर्थी परीक्षा में हुई अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे और दोबारा परीक्षा कराने की मांग कर रहे थे। इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे शिक्षक नेता राणा ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे और सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। उन्होंने कहा, “यह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। हम इस अन्याय को यूं ही नहीं सहेंगे और सुप्रीम कोर्ट में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।”

छात्रों और शिक्षकों में बढ़ता आक्रोश, प्रदर्शन की तैयारी
पटना हाईकोर्ट के फैसले के बाद अभ्यर्थियों और शिक्षकों में गहरी नाराजगी है। अभ्यर्थियों और शिक्षकों का कहना है कि वे अब संघर्ष तेज करेंगे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। कई संगठनों ने इस फैसले के विरोध में बिहार बंद बुलाने की चेतावनी भी दी है।
इस निर्णय से छात्रों का भरोसा टूट गया है। यह न केवल न्यायिक प्रक्रिया बल्कि शिक्षकों द्वारा पेश की गई दलीलों के साथ भी अन्याय है। इस फैसले से छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। लेकिन हम हार मानने वाले नहीं हैं, अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
– गुरू रहमान, शिक्षक
पटना में प्रदर्शन, सरकार और आयोग के खिलाफ नारेबाजी
फैसले के बाद पटना, गया, मुजफ्फरपुर और अन्य जिलों में अभ्यर्थियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। पटना के बीपीएससी मुख्यालय के बाहर छात्रों ने नारेबाजी करते हुए पुनर्परीक्षा कराने की मांग की। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक वे संघर्ष जारी रखेंगे। हालांकि, इस फैसले से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। यदि कोर्ट पुनर्परीक्षा के आदेश देता, तो प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकता था। अब परीक्षा दोबारा नहीं होगी, जिससे आयोग की आगे की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकेगी।
क्या अब सुप्रीम कोर्ट बनेगा आखिरी उम्मीद?
अब इस पूरे मामले में सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। अभ्यर्थियों और शिक्षकों की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे और वहां अपनी दलील पेश करेंगे। देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या उम्मीदवारों को न्याय मिल पाता है या नहीं। फिलहाल, हाईकोर्ट के इस फैसले ने बिहार में बीपीएससी परीक्षा को लेकर जारी विवाद पर विराम लगा दिया है, लेकिन यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों और शिक्षकों के आंदोलन के बीच अब सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी उम्मीद बचा है।