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पटना। राजधानी पटना के उदासीन नानकशाही सरस्वती विद्या मंदिर, फुलवारीशरीफ में आयोजित त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला शिक्षा के क्षेत्र में नए विचारों और प्रभावी रणनीतियों का मंच बनी। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की प्रांतीय इकाई भारतीय शिक्षा समिति, बिहार के तत्वावधान में संपन्न इस कार्यशाला ने न केवल आचार्यों के ज्ञानवर्धन का अवसर प्रदान किया, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए मार्गदर्शन भी किया।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यशाला का शुभारंभ
कार्यशाला का शुभारंभ शिक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियों एवं स्थानीय प्रबंधकारिणी समिति के अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ किया गया। इस अवसर पर पूर्व प्रखंड प्रमुख कमलेश कान्त चौधरी, पटना विभाग प्रमुख राजेश कुमार, सेवा कार्य प्रमुख गंगा चौधरी, अध्यक्ष शंकर गुप्ता, पैक्स अध्यक्ष राजीव जी, सचिव रवि प्रकाश, सह सचिव सहजानंद प्रकाश, कोषाध्यक्ष संजय कुमार और उपाध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। विद्यालय के प्रधानाचार्य सुसुम यादव ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया।

शिक्षा की नई कार्ययोजना पर हुआ विचार-विमर्श
प्रधानाचार्य सुसुम यादव ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य बीते वर्ष की कार्ययोजना की समीक्षा और आगामी सत्र 2025-26 के लिए नई कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा करना है, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य अतिथि कमलेश कान्त चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यशाला आचार्यों के आत्ममंथन का अवसर है, जहां वे विद्यार्थियों के बौद्धिक, शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास के नए आयाम खोजने पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि एक आचार्य की असली पहचान उसके सतत अध्ययन से होती है, और यदि वह स्वयं अध्ययनशील नहीं है, तो अपने विद्यार्थियों को भी सही दिशा नहीं दे सकता।

नई शिक्षा नीति और आचार्यों की भूमिका
विभाग प्रमुख राजेश कुमार ने शिक्षा के बदलते परिदृश्य और नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में आचार्यों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को निरंतर नवाचारों और शैक्षणिक परिवर्तनों से अपडेट रहना होगा ताकि वे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकें। कार्यशाला में विद्यालय के आचार्य राज कुमार दूबे, अजय कुमार, प्रमोद पांडेय, पूनम कुमारी, नीलम कुमारी, रूपम रानी, नूतन कुमारी, रिमझिम रौशन, चंदन सहित अन्य शिक्षकों ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। त्रिदिवसीय यह कार्यशाला शिक्षा प्रणाली में नवाचार और समग्र विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। इसमें प्राप्त विचारों और प्रस्तावों को आगामी सत्र में लागू करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक माहौल मिल सके।