अविश्वास प्रस्ताव: लोकसभा स्पीकर की निष्पक्षता पर जब-जब छिड़ी जंग, जानें अतीत की वो अनसुनी कहानियां…

Ritu Raj

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने की सुगबुगाहट ने देश के संसदीय इतिहास के उन पन्नों को फिर से पलट दिया है, जब-जब स्पीकर की कुर्सी को चुनौती दी गई। विपक्ष का आरोप है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता की कमी रही है और विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाया गया है।

विपक्ष के आरोपों का आधार;
बोलने की अनुमति: विपक्ष का दावा है कि सदन के नेता (विपक्ष) को पर्याप्त समय और अवसर नहीं दिए गए।
भेदभावपूर्ण व्यवहार: विपक्षी महिला सांसदों के साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार का आरोप।
कार्यवाही में व्यवधान: सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण निर्णयों की शिकायत।

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इतिहास के झरोखे से: जब निशाने पर आए स्पीकर

क्या कहता है कानून? (संवैधानिक प्रावधान)
1) अनुच्छेद 94 (c): इसके तहत स्पीकर को पद से हटाने का प्रावधान दिया गया है।
2) 14 दिनों का नोटिस: प्रस्ताव लाने से पहले अध्यक्ष को कम से कम 14 दिन की पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।
3) प्रभावी बहुमत (Effective Majority): प्रस्ताव को पारित करने के लिए सदन की तत्कालीन कुल सदस्य संख्या के बहुमत की आवश्यकता होती है।

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