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बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुओं की टोली आज पटना पहुंची और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास का घेराव करने की कोशिश की। मुख्यमंत्री आवास के नजदीक बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुओं को देख सुरक्षाकर्मी भी हैरत में पड़ गए। फिर बौद्ध भिक्षुओं से बातचीत करने पर पता चला कि पूरी दुनिया को शांति और करुणा की शिक्षा देने वाले बौद्ध भिक्षु आहत हैं और अपनी पीड़ा लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास का घेराव करने पहुंचे हैं। बौद्ध भिक्षुओं ने मांग की कि उनकी बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पहुंचाई जाए, वरना वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और कुछ भी हो जाए, यहां से हिलेंगे नहीं। दरअसल, बिहार के गया में विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल बोधगया में 12 फरवरी से बौद्ध भिक्षुओं का धरना प्रदर्शन जारी है. उनकी मांग है कि बीटी एक्ट यानी बोधगया टेंपल एक्ट 1949 खत्म किया जाए. महाबोधि मंदिर पर नियंत्रण को लेकर बौद्ध भिक्षु पिछले 82 दिनों से धरने पर बैठे हैं. रविवार को 82 दिनों बाद धरने से उठ कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने पटना तक की पैदल यात्रा पर निकले हैं. 12 फरवरी से प्रदर्शन शुरू: 12 फरवरी 2025 को एक बार फिर से इसी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू हुआ. हालांकि 12 फरवरी को बौद्ध भिक्षु पहले महाबोधि मंदिर के पास आमरण अनशन पर बैठे थे लेकिन बाद में आमरण अनशन खत्म कर ये धरने के तौर बदल गया और तभी से ये बोधगया दोमुहान के पास स्थित संबोधि द्वारा के पास अनिश्चितकाल धरने पर बैठ गए. 5 मई की रात को बौद्ध भिक्षुओं की टोली पटना पहुंची. 6 मई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने का समय मांगा गया है. समय नहीं मिलने के बाद बौद्ध भिक्षु सीएम आवास का घेराव करने पहुंच गए। ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फॉर्म और दूसरे बौद्ध संगठनों की ओर से यात्रा निकाली गई है. बौद्ध धर्मावलंबियों की यह मांग 90 के दशक से हैं. राज्य सरकार सदस्यों को करती है नामित: बीटीएमसी एक्ट 1949 के तहत प्रबंधन समिति में हिंदू समुदाय के चार लोग सदस्य बनाए जाते हैं. सदस्यों को नामित करने का अधिकार राज्य सरकार को है. वर्तमान में कमेटी में 7 सदस्य ही हैं. दो सीट वेकेंट है. वर्तमान कमेटी के सचिव महाशेवता महारथी हैं. हिंदू समुदाय से अरविंद कुमार सिंह और मिथुन मांझी हैं. बुद्धिस्ट में प्रेमा भंते और किरण लामा हैं.
बौद्ध भिक्षुओं ने पटना पहुंच क्यों घेर लिया CM नीतीश कुमार का आवास