सिटी पोस्ट लाइव :तेजप्रताप यादव के परिवार और पार्टी से निष्कासन को लेकर सवाल उठ रहा है. कई सवाल राजनीतिक गलियारों में अब उठने लगे हैं.सवाल वेवजह नहीं उठ रहे हैं.इसके कारण भी सामने आने लगे हैं. संवैधानिक रूप से तेज प्रताप अभी भी आरजेडी के विधायक हैं. तेज प्रताप आरजेडी के नेता ही नहीं एक विधायक भी हैं. ऐसे में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को जो प्रक्रिया अपनानी चाहिए वह नहीं अपनाई गई है.
संविधान के जानकारों के अनुसार आरजेडी के विधायक तेज प्रताप यादव को सबसे पहले नोटिस भेजनी चाहिए.पार्टी को नोटिस आने या न आने तक दिए गए समय का इंतजार करना चाहिए. फिर नोटिस का जवाब अगर आता तो उस जवाब के परिपेक्ष्य में उनका निष्कासन किया जाना चाहिए. पर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह पालन नहीं किया गया.सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स हैंडल पर जारी पत्र में पत्रांक, दिनांक नहीं होना भी संदेह पैदा करता है.राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तरफ से विधान सभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव को कार्रवाई संबंधित पत्र के हवाले से नहीं कहा गया है कि तेज प्रताप हमारे विधायक नहीं हैं.
ऐसे में ये सवाल सहज पैदा होते हैं कि क्या आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद द्वारा बड़े बेटे तेजप्रताप पर की गई कार्रवाई एक दिखावा है? क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X हैंडल पर लिखना तत्काल चुनावी रणनीति का मात्र हिस्सा भर है? क्या सामाजिक स्तर पर हो रही छीछालेदर से बचाव के लिए अपनाया गया एक रास्ता भर है?
तेज प्रताप अभी तक दल से निष्काषन के विरुद्ध मौन साधे हैं. इस मौन के पीछे किसी तूफान के आने के संकेत भी हो सकते हैं. यह या तो किसी पार्टी को ज्वाइन करने से हो सकता है या तेज प्रताप खुद कोई दल खड़ा कर लें. तेज प्रताप की खामोशी में अभी तक यह तो संकेत मिल रहे हैं कि वह कोई पार्टी ज्वाइन नहीं कर रहे हैं.ऐसे में वर्तमान आरजेडी की सत्ता के विरुद्ध तेज प्रताप कोई दल या संगठन बना कर खड़ा कर सकते हैं.
वैसे भी तेज प्रताप को संगठन और पार्टी खड़ा करने का अनुभव पुराना है. तेज प्रताप पार्टी बना कर संगठन खड़ा करने की खासियत भी है. वे ऐसा पहले भी कर चुके हैं.तेज प्रताप यादव जब नाराज हुए तो 2021 में छात्र जनशक्ति परिषद नाम से नया सामाजिक संगठन भी बनाया था. हालांकि तब वे राजद से निष्कासित नहीं किए गए थे, इसलिए उन्होंने यह घोषणा भी की थी कि ये संगठन आरजेडी का ही अभिन्न अंग होगा.
2019 लोकसभा चुनाव के पहले भी तेजप्रताप ने बागी रुख अपनाया था. तब तेजप्रताप ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए नए गुट का ऐलान किया था. तेज प्रताप ने अपने गुट का नाम रखा था लालू-राबड़ी मोर्चा रखा था. तब तेज प्रताप ने अपने मोर्चा के लिए शिवहर और जहानाबाद लोकसभा सीट मांगी थी.