सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के सहरसा जिले में घटित एक जघन्य हत्याकांड ने प्रशासनिक कार्रवाई की धीमी गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सदर थाना क्षेत्र के हकपाड़ा निवासी मो. फकरुउद्दीन की हत्या को अब 40 दिन से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन मुख्य आरोपी शमशेर आलम अभी तक गिरफ्त से बाहर है। इस लचर कार्रवाई से नाराज़ होकर सोमवार को मृतक की पत्नी नाजिया प्रवीण अपने परिजनों के साथ सहरसा पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं, जहां उन्होंने निष्पक्ष जांच और शीघ्र गिरफ्तारी की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई।
पीड़िता नाजिया प्रवीण ने बताया कि 22 अप्रैल की शाम उनके पति फकरुउद्दीन को रजिस्ट्री कार्यालय से लौटते वक्त गोली मार दी गई। उन्होंने सीधे तौर पर मोहल्ले के ही शमशेर आलम को हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है। नाजिया का कहना है कि पिछले एक वर्ष से उनके पति का आरोपी से जमीन विवाद चल रहा था, जो पहले दीवार निर्माण को लेकर शुरू हुआ और अंततः जानलेवा हमले में बदल गया।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी खुलेआम घूम रहा है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि अब उनके बेटे को भी जान से मारने की धमकी मिल रही है, जिससे उनका परिवार दहशत में जी रहा है। उन्होंने प्रशासन से परिवार की सुरक्षा की मांग भी की है, ताकि वे मानसिक और शारीरिक रूप से सुरक्षित रह सकें। इस मामले पर सदर थानाध्यक्ष सुबोध कुमार ने जानकारी दी कि एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, और बाकी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वहीं, पुलिस अधीक्षक हिमांशु कुमार ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि मामले की गहन जांच चल रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सहरसा हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या हमारे सिस्टम में पीड़ित की आवाज़ समय पर सुनी जा रही है? जब एक महिला को अपने परिवार की सुरक्षा के लिए खुद एसपी कार्यालय तक जाना पड़ता है, तो यह कानून व्यवस्था की असफलता की ओर इशारा करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में सक्षम होता है।